
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। “रागी एक पोषक तत्वों से भरपूर एवं जलवायु-अनुकूल फसल है। जिसकी खेती के लिए अन्य प्रमुख अनाजों की अपेक्षा कम पानी की आवश्यकता होती है। वर्तमान समय में एल-नीनो (El Niño) जैसी मौसमीय परिस्थितियों के कारण वर्षा में कमी एवं सूखे की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे समय में रागी जैसी कम जल आवश्यकता वाली फसलें किसानों के लिए अधिक सुरक्षित एवं लाभकारी विकल्प सिद्ध हो सकती हैं।”
आय एवं खाद्य एवं पोषण सुरक्षा :
कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली द्वारा आयोजित किसानों के खेत पर रागी (फिंगर मिलेट) की विभिन्न बुआई विधियों के मूल्यांकन हेतु ऑन-फार्म ट्रायल के दौरान ई. विनीता कश्यप ने उक्त बातें कही। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, “रागी की खेती न केवल जल संरक्षण में सहायक है, बल्कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में किसानों की आय एवं खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”
मार्गदर्शन व संचालन :
बताते चलें कि, कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली द्वारा किसानों के खेत पर रागी (फिंगर मिलेट) की विभिन्न बुआई विधियों के मूल्यांकन हेतु ऑन-फार्म ट्रायल का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. आर. के. तिवारी के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में आयोजित ट्रायल का संचालन कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ इं. विनीता कश्यप द्वारा किया गया।
बुआई, खरपतवार प्रबंधन तथा देखभाल :
इस ऑन-फार्म ट्रायल का मुख्य उद्देश्य रागी की विभिन्न बुआई विधियों का तुलनात्मक मूल्यांकन कर किसानों के लिए अधिक उपयुक्त, लागत प्रभावी तथा अधिक उत्पादन देने वाली तकनीक की पहचान करना है। परीक्षण के दौरान किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेत की तैयारी, संतुलित बीज दर, कतार से कतार एवं पौधे से पौधे की उचित दूरी, खरपतवार प्रबंधन तथा फसल की समुचित देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
उत्पादन एवं लाभ दोनों में वृद्धि :
इस दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. तिवारी ने किसानों से बदलते जलवायु एवं अनिश्चित मानसून के मद्देनजर मोटे अनाजों, विशेषकर रागी जैसी जलवायु-सहिष्णु फसलों को अपनी फसल प्रणाली में शामिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, “वैज्ञानिक पद्धति से बुआई, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा अनुशंसित तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन एवं लाभ दोनों में वृद्धि कर सकते हैं।”
उन्नत तकनीक को अपनाने की जताई इच्छा :
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने विभिन्न बुआई विधियों का अवलोकन किया तथा वैज्ञानिकों से तकनीकी जानकारी प्राप्त की। किसानों ने भविष्य में रागी की वैज्ञानिक खेती अपनाने एवं केंद्र द्वारा सुझाई गई उन्नत तकनीकों का अपने खेतों में प्रयोग करने की इच्छा व्यक्त की।
किसानों के लिए सलाह :
– रागी की बुआई समय पर एवं अनुशंसित विधि से करें।
– प्रमाणित एवं उन्नत किस्म के बीज का ही प्रयोग करें।
– संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं समय पर खरपतवार नियंत्रण अपनाएँ।
– कम वर्षा एवं जल संकट की स्थिति में रागी जैसी कम पानी में सफल होने वाली फसलों को प्राथमिकता दें।
– कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के संपर्क में रहकर नवीनतम कृषि तकनीकों को अपनाएँ, जिससे उत्पादन एवं आय में वृद्धि हो सके।