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Home » धान की जगह वैकल्पिक फसल लगाएं किसान : वैज्ञानिक

धान की जगह वैकल्पिक फसल लगाएं किसान : वैज्ञानिक

किसान भाइयों केलिए समसामयिक सुझाव जारी
Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar23/06/2026No Comments3 Mins Read
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खेत तैयार करते किसान।

 ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 समस्तीपुर। आगामी कुछ दिनों में मानसून की कमजोर स्थिति को देखते हुए ऊँचास जमीन में खरीफ धान की बीज स्थली तैयार करने का कार्य फिलहाल न करें। जिन किसानों के पास सिंचाई की समुचित सुविधा उपलब्ध है, वे निचली भूमि में मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों जैसे राजेन्द्र नीलम्, राजेन्द्र भगवती, राजेन्द्र सरस्वती एवं राजेन्द्र श्वेता का बिचडा बीजस्थली में गिराने तथा नर्सरी तैयार करने का कार्य जारी रख सकते हैं। बीजस्थली में पर्याप्त नमी बनाए रखने एवं पौधों को सूखने से बचाने के लिए आवश्यकता अनुसार जीवनरक्षक सिंचाई करें।

 डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र द्वारा जारी समसामयिक सुझाव में वैज्ञानिकों ने उक्त बातें कही है। उन्होंने कहा है कि, 

खड़ी फसलों में जीवनरक्षक सिंचाई :

सिंचाई सुविधा वाले किसान ऊँचास जमीन में भिंडी, कहू, खीरा, नेनुआ एवं लौकी जैसी सब्जी फसलों की बुआई कर सकते है। वर्तमान उच्च तापमान एवं अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए खेत में खड़ी फसलों में नमी बनाए रखने हेतु आवश्यकता अनुसार जीवनरक्षक सिंचाई करें।

वैकल्पिक फसल दलहन की करें खेती :

वर्तमान कमजोर मानसूनी परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे ऊँचास जमीन में धान के स्थान पर अरहर (राजेन्द्र अरहर-1) एवं उड़द आदि दलहन या अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाएँ।

 खरीफ मक्के की करें तैयारी व बुआई :

खरीफ मक्का की खेत तैयारी एवं शक्तिमान-2, शक्तिमान 5, शक्तिमान 6 एवं राजेन्द्र शंकर मक्का-3 किस्मों की बुआई का कार्य शीघ्र पूरा करें। अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर 100-150 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ 30 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम स्फुर तथा 50 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करें एवं बुआई के समय खेत में पर्याप्त नमी सुनिश्चित करें।

 खरीफ प्याज की नर्सरी :

किसान खरीफ प्याज की नर्सरी तैयार करें। एग्री फाउंड डार्क रेड (एडीआर), एन-53, भीमा सुपर एवं अर्का कल्याण किस्मों के गुणवत्तायुक्त बीजों की व्यवस्था करें। एडीआर की नर्सरी ऊँची क्यारियों पर तैयार करें तथा अधिक वर्षा से बचाव हेतु 1.5 मीटर ऊँचाई पर पॉलीथीन आवरण की व्यवस्था करें।

 गन्ने व लीची के बगीचे की देखभाल :

किसानों को सलाह दी जाती है कि शरदकालीन गन्ने में नत्रजन की शेष मात्रा का प्रयोग कर मिट्टी चढ़ाएँ तथा वसंतकालीन गन्ने में निराई-गुड़ाई एवं उपरिवेशन का कार्य करें। वहीं लीची की फल तुड़ाई के बाद बगीचों में छंटाई (प्रूनिंग) एवं साफ-सफाई करें तथा गिरे हुए पत्तों एवं सूखी टहनियों को हटाकर नष्ट करें, जिससे कीट एवं रोगों का प्रकोप कम हो सके।

 पशुओं की देखभाल :

दुधारू पशुओं में संक्रामक रोगों से बचाव हेतु पशु चिकित्सकों के निर्देशानुसार रोग निरोधक उपाय अपनाएँ तथा मेघगर्जन एवं वज्रपात के समय पशुओं को खुले में न रखें।

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Centre For Advanced Studies On Climate Change Pusa Dr. Abdus Sattar Dr. Rajendra Prasad Central Agriculture University Pusa Rural Agricultural Weather Service
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