
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। पुलिस लाइन में लाखों रुपये की लागत से निर्मित श्वान दस्ता भवन बन कर तैयार है। लेकिन अब तक यहां एक अदद श्वान नहीं आ सका है। फ़लतः यह भवन श्वानों की जगह पुलिस कर्मियों का बसेरा बना हुआ है।
सारी आवश्यक सुविधाओं से लैस है श्वान भवन :
पुलिस लाइन में बन चुके इस श्वान भवन में श्वानों व उनके प्रशिक्षक सहित श्वान दस्ते के पुलिस कर्मियों के रहने के लिए आवश्यक सुविधाओं से लैस कमरे की व्यवस्था है। इसके अलावा कर्मी व श्वानों के भोजन के लिए कीचन, वाकिंग के साथ–साथ प्रशिक्षण एवं अभ्यास की भी सुविधा है। श्वानों के लिए भवन में बाथरूम, सीढ़ी व रैंप भी बनाये गये हैं।
प्रशासनिक सुस्ती या लापरवाही :
श्वान भवन का मकसद, जिले में होने वाली आपराधिक वारदातों के बाद त्वरित जांच के लिए प्रशिक्षित श्वान दस्ते को घटनास्थल पर भेज कर मामले का त्वरित निष्पादन करना था। लेकिन इसे प्रशासनिक सुस्ती कहें या लापरवाही या फिर अनिच्छा, कारण कुछ भी हो मगर हकीकत यही है कि लाखों की लगत से तैयार, अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस, इस श्वास भवन में रहने के लिए प्रशिक्षित कुत्तों को नहीं लाया जा सका है।
अन्य जिलों पर है निर्भरता : देरी से होती है परेशानी
बताते चलें कि विगत करीब 5 वर्षों से हर जिले में श्वान दस्ते के तैनाती की कवायद जारी है। इसी के तहत समस्तीपुर में श्वान भवन का निर्माण कराया गया था। मगर आज भी किसी घटना के अनुसंधान के लिए पटना मुजफ्फरपुर, या दरभंगा से श्वान दस्ते को समस्तीपुर बुलाया जाता है जिसमें समय अधिक लगता है। जिस कारण स्थानीय पुलिस को अनुसंधान में अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कहते हैं विशेषज्ञ – समय के साथ कमजोर हो जाता है साक्ष्य :
फॉरेंसिक एक्सपर्ट बताते हैं कि, “घटना स्थल पर बिखरे साक्ष्यों से गंध व रक्त के नमूने घटना के कुछ घंटों के बाद साक्ष्य के मामले में कमजोर पड़ने लगते हैं। ऐसे में डॉग स्कवाड का शीघ्र पहुंचना फायदेमंद होता है।”
बता दें कि, चोरी, हत्या, जैसे मामलों के अनुसंधान के अलावा शराब सहित मादक पदार्थों एवं विस्फोटक पदार्थों को पहचानने में डॉग स्क्वॉड बेहद कारगर साबित होते हैं।इसी लिए महत्वपूर्ण लोगों के कार्यक्रम से पूर्व सुरक्षा के ख्याल से श्वान दस्ते की मदद ली जाती रही है।
स्वाभिमान बटालियन के जवानों का आशियाना :
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस लाइन में श्वान दस्ता के लिए बने श्वान भवन में श्वान नहीं रहने के कारण स्वाभिमान बटालियन के जवानों का आशियाना बन गया हैं।