
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। ”मिथिला और मैथिल की पहचान ‘मखाना’ उत्पादन के क्षेत्र में बिहार विशेष रूप से मिथिला क्षेत्र देश भर में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। मिथिला के प्रवेश द्वार समस्तीपुर जिले में भी मखाना उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। जिन्हें वैज्ञानिक तकनीक एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से और अधिक विकसित किया जा सकता है।”
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का सशक्त माध्यम :
कृषि विज्ञान केन्द्र लादा में मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण के दौरान उक्त बातें कही। इस क्रम में उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ व्यावसायिक एवं मूल्य आधारित कृषि को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि, “मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण आर्थिक स्वावलंबन के साथ –साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का सशक्त माध्यम बन सकता है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य :
बताते चलें कि, गुरुवार को जिलाधिकारी श्री कुशवाहा की अध्यक्षता में सिंघिया के लादा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, में “मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मखाना की वैज्ञानिक खेती, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक, मूल्य संवर्धन एवं विपणन के संबंध में प्रशिक्षित कर उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करना था।
केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं :
अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री कुशवाहा ने केवीके और कृषि विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि, केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं बेहतर विपणन प्रणाली के माध्यम से किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना भी आवश्यक है। इसके लिए कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराते रहें।”
आधुनिक तकनीकों का दिया प्रशिक्षण :
प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने मखाना की वैज्ञानिक खेती, तालाब प्रबंधन, गुणवत्तायुक्त बीज का चयन, पौध संरक्षण, रोग एवं कीट प्रबंधन, कटाई, भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा विपणन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। साथ ही किसानों की जिज्ञासाओं और समस्याओं का समाधान करते हुए व्यवहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
योजनाओं का अधिकाधिक लाभ कराएं उपलब्ध :
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि, “मखाना उत्पादक किसानों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उपलब्ध करायें। साथ ही उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता एवं विपणन सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।”
मखाना आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने पर बल :
इस क्रम में उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मखाना आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। कार्यक्रम में किसानों ने प्रशिक्षण के दौरान मखाना प्रसंस्करण की आधुनिक विधियों का अवलोकन किया तथा विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
उपस्थिति :
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह, जिला कृषि पदाधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र, लादा के प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विभाग के अन्य पदाधिकारी, कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, प्रगतिशील किसान तथा बड़ी संख्या में मखाना उत्पादक किसान उपस्थित थे।
आय बढ़ाने का आह्वान :
कार्यक्रम के अंत में किसानों से वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर गुणवत्तापूर्ण मखाना उत्पादन करने तथा प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने का आह्वान किया गया।