
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। समयानुसार परिवर्तन सृष्टि का नियम है। फिर भला कृषि इससे कैसे अछूता रह सकता है। फ़लतः देश में कृषि का परिदृश्य बड़ी तेजी से बदल रहा है। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल एग्रीकल्चर और रोबोटिक्स पूरी दुनिया के कृषि के स्वरूप को बदल देंगे। इसलिए जरूरी है कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अभी से इन क्षेत्रों में शोध करके देश की कृषि को बढ़ावा दे और इसे विश्व में सबसे उन्नत बनायें।
गहन समीक्षा के बाद स्वीकृति :
गुरुवार को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थित विद्यापति सभागार में गुरुवार को 21वीं शोध परिषद , खरीफ-2026 (विशेष) की दो दिवसीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही। इस क्रम में उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी के विजन – सन् 2047 तक देश को विकसित करने में कृषि वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अनुसंधान परिषद की इस विशेष बैठक में इन सब क्षेत्रों के अतिरिक्त कृषि से संबद्ध अन्य क्षेत्रों में शोध की परियोजना की प्रस्तुति होगी और उनकी गहन समीक्षा के बाद स्वीकृति प्रदान की जायेगी।
होगी 62 नई शोध परियोजनाओं की समीक्षा :
बताते चलें कि, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के विद्यापति सभागार में गुरुवार को 21वीं शोध परिषद , खरीफ-2026 (विशेष) की दो दिवसीय बैठक की शुरुआत हुई। बैठक का उद्देश्य विश्वविद्यालय निधि से वित्त पोषित 62 नई शोध परियोजनाओं की समीक्षा कर उन्हें अनुमोदित करना था।
देश की प्रतिष्ठा में भी होगी वृद्धि :
इस अवसर पर नवसारी एवं जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ए. आर. पाठक, ने कहा कि विश्वविद्यालय न देश भर में डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एनआइआरएफ रैंकिंग में विश्वविद्यालय ने तीन वर्षों में 52 वें रैंक से आठवां रैंक हासिल किया है, यह विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता का परिचायक है। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय ने रोबोटिक्स और प्रेसिजन एग्रीकल्चर में जो अनुसंधान शुरू किया है उसके परिणाम से देश की प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होगी।
कृषि समाधान किसानों की आय बढ़ाने में मददगार :
कोटा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ए. के. व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने संसाधनों से एक सौ से अधिक शोध परियोजनायें चला रहा है और इस विशेष बैठक में 62 नये शोध परियोजनाओं को स्वीकृति के उपरांत विश्वविद्यालय के संसाधनों से वित्त पोषित किया जायेगा। यह अपने आप में अनूठा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल और डेटा आधारित कृषि समाधान किसानों की आय बढ़ाने में मददगार होंगे।
अगले कुछ सालों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनेगी पहचान :
निदेशक शोध डॉ. ए. के. सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि आज से चार साल पहले गिनती के विश्वविद्यालय वित्त पोषित परियोजना होती थी। लेकिन आज सौ से अधिक शोध परियोजनाएं चल रही है और साठ से अधिक विश्वविद्यालय के वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्तुत की जा रही है। इससे पता चलता है कि विश्वविद्यालय का स्तर क्या है और अगले कुछ सालों में यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करेगा।
मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन :
अनुसंधान परिषद की बैठक में बाह्य विशेषज्ञ के रूप में डॉ. शैलेंद्र राजन, पूर्व निदेशक, आईसीएआर-सीआईएसएच लखनऊ, डॉ. एस.के. चतुर्वेदी, निदेशक शोध, आरएलबीसीएयू झांसी, डॉ. सचिन नंदगुड़े, एमपीकेवी रहूरी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बैठक में सह निदेशक शोध डॉ मुकेश कुमार के निर्देशन में डॉ प्रियंका त्रिपाठी ने मंच संचालन किया जबकि डॉ संतोष ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
उपस्थिति :
कार्यक्रम के दौरान डीन पीजीसीए डॉ मयंक राय, निदेशक शिक्षा डा उमाकांत बेहरा, डीन फिशरीज डॉ पी पी श्रीवास्तव, निदेशक स्कूल आफ़ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट डॉ नीरज कुमार समेत सभी वैज्ञानिक, केवीके के प्रधान, शिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।