
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के विद्यापति सभागार में मंगलवार को क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति की बैठक-2026 आयोजित की गई। बैठक में 200 से अधिक किसान और प्रसार परिषद के सदस्य शामिल हुए।
समस्याएं विश्वविद्यालय के आगामी शोध का विषय :
कृषि क्षेत्र की जमीनी समस्याओं की पहचान कर अगले वर्ष के लिए अनुसंधान और प्रसार की प्राथमिकताएं तय करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पाण्डेय ने कहा कि, विश्वविद्यालय किसानों के साथ मिलकर टिकाऊ और लाभकारी कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। आज किसानों ने जो समस्याएं बताई हैं, वही हमारे विश्वविद्यालय के आगामी शोध का विषय बनेंगी।
समिति का उद्देश्य और निदेशालय अनुसंधान :
कुलपति ने कहा कि, प्रयोगशाला तक सीमित रहकर शोध करने से बेहतर है कि हम खेत की जरूरत के हिसाब से काम करें। क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति का उद्देश्य ही अनुसंधान और प्रसार को किसान-केंद्रित बनाना है। निदेशालय अनुसंधान प्राथमिकता के आधार पर इन मुद्दों पर प्रस्ताव तैयार कर परिषद में रखेगा, ताकि त्वरित समाधान निकल सके।
समस्या के समाधान के लिए विवि तत्पर :
इसके पूर्व कार्यक्रम को दिशा देते हो ये निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रत्नेश कुमार झा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि, कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से विश्वविद्यालय किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सतत् तत्पर है।
प्राथमिकता वाले मुद्दे :
अपने संबोधन में निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि संकलित समस्याओं को हम तीन वर्गों में बांटेंगे – त्वरित समाधान वाले, मध्यम अवधि के शोध वाले और दीर्घकालिक नीतिगत हस्तक्षेप वाले। उन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका सीधा असर उत्पादकता और किसानों की आय पर पड़ता है।
समस्याओं पर चर्चा :
बताते चलें कि, बैठक में ‘किसानों की समस्याएं एवं क्षेत्रीय कृषि चुनौतियां’ विषय पर जिला-वार चर्चा हुई। जिसमें विभिन्न जिलों से आए किसानों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। समस्याओं में प्रमुख रूप से कीट एवं रोग का प्रकोप, गुणवत्तापूर्ण बीज की अनुपलब्धता, सिंचाई की कमी, मिट्टी की उर्वरता में गिरावट, बाजार में मूल्य में उतार-चढ़ाव और जलवायु परिवर्तन से फसलों को हो रहा नुकसान शामिल रहे। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और अन्य विशेषज्ञों ने भी जमीनी स्थिति पर जानकारी दी।
अनुशंसाओं को दिया गया अंतिम आकार :
देर शाम तक चली इस बैठक को स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मयंक राय ने भी सभा को संबोधित किया। बैठक में क्षेत्र के लिए अनुसंधान एवं प्रसार की प्राथमिकताएं और अनुशंसाएं अंतिम रूप से तय की गईं। इसके बाद खुली चर्चा कर अनुशंसाओं को अंतिम आकार दिया गया।
