
रत्न शंकर भारद्वाज
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क् विद्यापतिनगर । प्रखंड मुख्यालय के गोस्वामी समाज सहित क्षेत्र के लोग मिथिला लोककंठ के नायक कवि कोकिल विद्यापति की समाधि भूमि विद्यापतिधाम को राष्ट्रीय क्षितिज पर पहुंचाने के लिए पर्यटन स्थल का दर्जा हासिल करने की बाट जोह रहे हैं।
कवि परंपरा को जीवित रखने वाले गणेश गिरि कवि कहते हैं कि मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति ने कार्तिक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को इसी पावन भूमि में महानिर्वाण प्राप्त किया था। यहां पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पूरे विद्यापति प्रखंड में एकमात्र ‘विद्यापति इंटर कालेज’ की मान्यता आठ वर्ष पहले समाप्त कर दी गई। इससे करीब 1800 छात्रों के भविष्य से अन्याय हुआ था।
वर्तमान सांसद नित्यानंद राय ने इसके लिये प्रयास किया लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। गौरतलब है कि विद्यापति प्रखंड की करीब एक दर्जन अधिक पंचायत में लगभग 1.50 लाख मतदाता हैं।
विद्यापतिधाम में पूजा- अर्चना कराने वाले हरिओम गिरि ने कहा कि यह क्षेत्र ज्ञान की भूमि रही है जहां वेद, संस्कृत भी पल्लवित होती रही हैं। बीते वर्षों में क्षेत्र का विकास भी हुआ है लेकिन ज्ञान परंपरा से जुड़े संस्कृत एवं वेद पाठशालाएं यहां नहीं हैं। संस्कृत एवं वेद शिक्षा के लिये बच्चों को वाराणसी एवं अन्य स्थानों पर भेजना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि वाराणसी का प्रतिनिधित्व करने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां संस्कृत एवं वैदिक शिक्षा के लिये संस्थान स्थापित करेंगे। क्षेत्र के लोग लम्बे समय से विद्यापतिनगर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।
विद्यापतिधाम मंदिर के कोषाध्यक्ष रत्न शंकर भारद्वाज का कहना है कि यह महान कवि विद्यापति की निर्वाण भूमि है, जो साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह कामना लिंग के रूप में प्रसिद्ध है और यहां शिव-पार्वती की पूजा होती है। यह स्थान रेलमार्ग (विद्यापतिधाम स्टेशन) और सड़क मार्ग से जुड़ा है और प्रशासन द्वारा राजकीय स्तर पर वार्षिक विद्यापति महोत्सव आयोजित किए जाते हैं, लेकिन पूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में आधिकारिक घोषणा लंबित है।
इसे उत्तर बिहार का देवघर कहा जाता है, जहाँ सावन और अन्य अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु (नेपाल, उत्तर प्रदेश, बंगाल से भी) आते हैं।विद्यापतिधाम रेलवे स्टेशन का विकास एवं विस्तार हुआ है साथ ही अन्य विकास कार्य भी हो रहे हैं। लेकिन इसे पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बाद इलाके में विकास और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा एवं पलायन रूकेगा।
इस क्षेत्र में रोजगार के अन्य साधन नहीं हैं। वर्तमान में यह श्री बालेश्वर स्थान विद्यापतिधाम के नाम से प्रसिद्ध है। इस स्थान पर मैथिली, संस्कृत, बंगला, अवधी और अवहट्ट भाषा के विद्वान कवि कोकिल विद्यापति ने समाधि ली थी। ऐसी किंवदंति है कि विद्यापति जी के आह्वान पर माँ गंगा स्वयं इस स्थान पर पहुंची तथा उन्हें कार्तिक धवल त्रयोदशी को अपने अंक में समेटते हुए लौट गयी थी।
किंवदंतियों के मुताबिक यहां स्वयं भगवान शिव कवि कोकिल विद्यापति की भक्ति भावना से प्रसन्न होकर विराजमान हुए थे।इस ऐतिहासिक तीर्थ स्थल पर पहुंचे के लिए समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय से आठ किलोमीटर दक्षिण तथा बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड से आठ किलोमीटर पश्चिम में स्थित यह तीर्थ स्थल पक्की सड़कों और रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है।
यहां से मात्र पांच किलोमीटर दक्षिणवर्ती इलाके में गंगा नदी है, जहां चैमथ (चमथा) घाट पर राजा जनक के स्नान करने आने का उल्लेख भी ग्रंथों में मिलता है। विद्यापतिनगर (विद्यापतिधाम) आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है और पर्यटन स्थल बनने की पूरी क्षमता रखता है, पर अभी तक इस दिशा में पूर्ण दर्जा नहीं मिला है, हालांकि प्रयास जारी हैं।