
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क दरभंगा/जाले। बढ़ती आबादी और खानपान के प्रति जागरूकता से स्वाद रहित फाइबर से भरपूर मखाना की मांग में लगातार वृद्धि के कारण मखाना का बाजार भी फैला है। इस बढ़ती मांग से फैले मखाना बाजार ने मखाना उत्पादन को नई दिशा दी है जिससे यह स्वरोजगार का बेहतर और विश्वसनीय विकल्प बन कर उभरा है।
कृषि विज्ञान केन्द्र, जाले, दरभंगा परिसर में मखाना नर्सरी उत्पादन एवं प्रबंधन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केवीके जाले के अध्यक्ष सह वरीय वैज्ञानिक डॉ दिव्यांशु शेखर ने उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाने केलिए मखाना उत्पादन इसके साथ–साथ प्रबंधन कौशल और प्रसंस्करण तकनीक की जानकारी भी महत्वपूर्ण है। हमें विश्वास है कि इस तरह के प्रशिक्षण मखाना उद्योग को मजबूती प्रदान करेंगे।
बताते चलें कि सोमवार को कृषि विज्ञान केन्द्र, जाले, दरभंगा परिसर में मखाना नर्सरी उत्पादन एवं प्रबंधन विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। केंद्र निदेशक एवं वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ दिव्यांशु शेखर की अध्यक्षता में अतिथि के स्वागत, सम्मान एवं परस्पर परिचय के बाद प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ। इस प्रशिक्षण में दरभंगा जिले के विभिन्न प्रखंडों से 35 प्रशिक्षणार्थी हिस्सा ले रहे हैं ।
इस अवसर पर प्रशिक्षक डॉ प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि भारत विश्व में मखाना का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वहीं राष्ट्रीय स्तर बिहार देश का प्रमुख उत्पादक राज्य है। जिसकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में भरपूर मांग है। 2025 में, विभिन्न राज्यों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मखाना की खेती लगभग 13,000 हेक्टेयर से बढ़कर 35,000 हेक्टेयर हो गई।
उन्होंने बताया कि मखाना का प्रमुख उत्पादक राज्य होने के नाते, बिहार में प्रसंस्कृत मखाना के कुल उत्पादन का लगभग 80% उत्पादन अकेले दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया और कटिहार जिलों से आता है।
निर्यात की बात करें तो, भारत ने हाल के वर्षों में लगभग 12,000 मीट्रिक टन मखाना निर्यात किया है। मखाने की बढ़ती मांग को देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि आने वाले वर्षों में इसकी मांग और भी बढ़ेगी, क्योंकि खानपान को लेकर सजग उपभोक्ता पोषक तत्वों से भरपूर और स्थानीय स्तर पर उत्पादित स्नैक्स को अपनी खानपान शैली के हिस्से के रूप में प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस दौरान डॉ विश्वकर्मा ने मखाना से जुड़े हुए विभिन्न प्रकार के पहलुओं जैसे नर्सरी उत्पादन उसका उन्नतशील वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती उसकी तालाब एवं खेत दोनों माध्यम से निकालने की विधि का वैज्ञानिक एवं पारंपरिक तरीके से अवगत कराया ।
प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में ई निधि कुमारी ने मखाने में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न उपकरणों के बारे में जानकारी दी।
प्रशिक्षण के क्रम में आने वाले दिनों में केंद्र के अन्य वैज्ञानिक भी विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे डॉ चंदन कुमार मखाना की नर्सरी का प्रबंधन, डॉ . पूजा कुमारी मखाना के प्रसंस्करण एवं इसके प्रसंस्कृत उत्पादों तथा राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वैज्ञानिक भी प्रयोगात्मक तरीके से नर्सरी उत्पादन की तकनीक किसानों को बताएंगे। प्रशिक्षण के दौरान केंद्र के अन्य कर्मी कार्यक्रम में उपस्थित रहे ।