
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क समस्तीपुर। जब बात समाज के कमजोर तबके की होती है, तो अक्सर जिम्मेदारी सरकार या अनुभवी संगठनों पर छोड़ दी जाती है। लेकिन “द उम्मीद” ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया।
बिहार के सबसे कम उम्र के युवाओं द्वारा संचालित इस संगठन ने यह साबित कर दिखाया कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो उम्र कोई बाधा नहीं बन सकती। वंचित समुदाय के लोगों के बीच उनके स्वास्थ्य, व शैक्षणिक उत्थान के क्षेत्र में सक्रिय, नई सोच और युवा उर्जा से ओतप्रोत द उम्मीद स्लम एरिया के लोगों में उम्मीद की किरण बन चुकी है।
युवाओं की सोच से निकली एक क्रांति “द उम्मीद” ने रविवार को शहर के एक निजी परिसर में अपने तीन वर्षीय प्रेरणास्पद यात्रा का उत्सव धूमधाम से मनाया।
आगत अतिथियों के स्वागत सम्मान एवं उनके द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन की औपचारिकता के साथ द उम्मीद का तीसरा वार्षिकोत्सव आरंभ हुआ। इस अवसर पर स्वागत संबोधन एवं वार्षिक प्रतिवेदन के विषय प्रवेश कराते हुए संस्थापक अमरजीत कुमार ने कहा कि,
द उम्मीद की स्थापना इस विश्वास पर हुई थी कि, हर झुग्गी सिर्फ गरीबी की दास्तान नहीं, पल पल सुलगते सपनों और अवसर की आस में सिसकते हुनर की पहचान है। अपने संबोधन में उन्होंने संस्था की स्थापना, प्रारंभिक यात्रा, चुनौतियाँ और समाज की तत्कालीन सोच और प्रतिक्रिया को साझा किया।
मंच संचालन संस्था की सह-संस्थापिका श्वेता गुप्ता द्वारा बेहद प्रभावशाली ढंग से किया गया।
इस दौरान मुखर समाजसेवी और युवा प्रेरक सुचिता सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि द उम्मीद जैसे संगठनों की वजह से ही समाज में असली बदलाव आता है। यह भी एक अकाट्य एवं प्रमाणिक सत्य है कि जब युवा जनसेवा को एक मिशन बना लेता है तब निश्चय ही नये राष्ट्र का निर्माण होता है।
तीसरे वर्षगांठ पर आयोजित इस समारोह में कई सम्माननीय अतिथि शामिल हुए, जिन्होंने संस्था के कार्यों की सराहना की और अपने विचार भी साझा किए। अपने संबोधन में, अध्यक्ष द उम्मीद मेडिकल कोर डॉ. सौमेंदु मुखर्जी ने कहा कि द उम्मीद, समस्तीपुर में जिस जज्बे से कार्य कर रही है, वह प्रेरणादायक है। समाज के हर वर्ग को इस प्रयास से जुड़ना चाहिए।
इस अवसर पर मंदिरा पालित मिलानी महिला संघ, अपराजिता यादव, सूबेदार मेजर महेन्द्र – 12 बिहार बटालियन एनसीसी, कुंदन कुमार रॉय – यूथ मोटिवेटर, सौरव सुमन, जितेंद्र कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।