
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क दरभंगा/जाले। कृषि विज्ञान केन्द्र जाले दरभंगा में वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ दिव्यांशु शेखर की अध्यक्षता में मृदा एवं जल अभियंत्रण विशेषज्ञ ई. निधि कुमारी ने संरक्षित खेती तकनीक पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र वितरण कर समापन किया।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए कार्यक्रम समन्वयक ई. निधि ने बतलाया कि इन पांच दिनों में किसानों को संरक्षित खेती तकनीक के महत्व एवं लाभ तथा खुले खेत बनाम संरक्षित खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ हीं संरक्षित खेती तकनीक में प्रयोग होने वाली संरचनाएँ जैसे कि पॉलीहाउस, नेट हाउस, लो टनल, हाई टनल, शेड नेट हाउस एवं इसमें लगने वाले लागत, सब्सिडी एवं सरकारी योजनाएँ के बारे में जानकारी दी गई।
इसमें जलवायु प्रबंधन तापमान, आर्द्रता नियंत्रण, वेंटिलेशन प्रबंधन, शेड नेट के उपयोग की भी जानकारी दी गई एवं मल्चिंग (प्लास्टिक मल्चिंग), ड्रिप सिंचाई प्रणाली, फर्टिगेशन तकनीक एवं फॉगर्स प्रणाली पर भी प्रशिक्षण दी गई।
पांचवें दिन के प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केन्द्र लादा, समस्तीपुर की वरिष्ठ वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ सुनीता कुशवाहा ने पौध तैयार करने हेतु विभिन्न चुनौतियों, उनका निदान एवं फायदों की जानकारी दी।
इस क्रम में परिस्थिति, के अनुसार फसल एवं किस्मों के चयन तकनीक की भी जानकारी दी गई। डॉ. कुशवाहा ने बतलाया कि इस तकनीक से सब्जियाँ जैसे कि टमाटर, खीरा, शिमला मिर्च, बैंगन, फूल जैसे कि जरबेरा, गुलाब, कार्नेशन,मसाले व नर्सरी उत्पादन हेतु उपयुक्त किस्मों का चयन करके नर्सरी एवं पौध उत्पादन भी किया जा सकता है।
उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने प्रशिक्षण के दौरान प्रो-ट्रे नर्सरी, कोकोपीट इत्यादि का उपयोग करके स्ट्रॉबेरी की खेती एवं पौध तैयार करने के गुड़ सिखाए। कार्यक्रम में गृह वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी एवं केवीके के सभी कर्मचारीगण उपस्थित थे । इस कार्यक्रम में दरभंगा जिले के विभिन्न प्रखंडों से 37 महिला एवं पुरुष किसानों ने हिस्सा लिया।