
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 जाले। कृषि विज्ञान केंद्र जाले दरभंगा में वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ दिव्यांशु शेखर की अध्यक्षता में ग्रामीण युवक एवं युवतियां हेतु सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना एवं रखरखाव विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत हुई।
सिंचाई प्रणाली की स्थापना एक उपयोगी कदम :
इस अवसर पर डॉ. शेखर ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि, “भूमिगत जल के स्तर में लगातार गिरावट के दौर में भू जल संरक्षण के लिए सिंचाई प्रबंधन बेहद आवश्यक है। इस क्रम में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना एक कारगर एवं बेहद उपयोगी कदम है।“
प्रशिक्षण को लेकर ई. निधि ने दी जानकारी :
प्रशिक्षण की जानकारी देते हुए कार्यक्रम समन्वयक ई. निधि कुमारी ने बतलाया कि, “आज से चलने वाले पांच दिवसीय प्रशिक्षण में खेती में होने वाली सिंचाई प्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली जैसे टपक सिंचाई, फव्वारा विधि, माइक्रो स्प्रिंकलर इत्यादि के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अंतर्गत सुक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना एवं इसके रखरखाव के बारे में बतलाया जाएगा।
ई. निधि ने बताया कि, “कार्यक्रम में अंडरग्राउंड पाइप लाइन द्वारा सिंचाई की पद्धति एवं हाई टेक नर्सरी में होने वाले सभी प्रकार के सिंचाई प्रणाली एवं उर्वरक देने की प्रणाली पर भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ हीं सरकार द्वारा चलाई जाने वाली विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।”
35% तक पानी की हो सकती है बचत :
उन्होंने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली सब्जी एवं फूलों की खेती सहित अन्य नर्सरी उगाने हेतु बहुत ही लाभकारी प्रणाली है। जिससे की पानी की जल प्रयोग क्षमता 80 से 95% तक होती है। इससे पानी की बचत 30-35 % तक की जा सकती है।
वैज्ञानिक पद्धति से खेती :
इस क्रम में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ पूजा कुमारी, डॉ प्रदीप कुमार विश्वकर्मा, डॉ. चन्दन कुमार एवं निकरा प्रोजेक्ट की वरीय वैज्ञानिक डॉ पूजा कुमारी ने कृषकों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती के बारे में जानकारी प्रदान किया। इस कार्यक्रम में दरभंगा जिले के 25 कृषकों ने हिस्सा लिया।