
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क जाले। बिहार बेशक मशरूम उत्पादन में नंबर वन राज्य है। मगर उत्पादन की तुलना में मशरूम उपभोक्ताओं की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे मांग में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इस कारण मांग और आपूर्ति के बीच खाई गहरी होती जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र जाले के अध्यक्ष डॉ दिव्यांशु शेखर ने मंगलवार को 5 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि इस खाई को पाटने के लिए आवश्यक उत्पादन के लिए मशरूम उत्पादन का दायरा बढ़ाने और मशरूम उत्पादक किसानों को आकर्षित कर उन्हें तकनीकी व प्रशिक्षण देने की अत्यंत आवश्यकता है।
बताते चलें कि प्रमाण पत्र वितरण के साथ डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत दरभंगा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, जाले में बटन मशरूम पर केंद्रित *मशरूम की खेती* विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलता पूर्वक संपन्न हो गया।
इस अवसर पर केंद्र के अध्यक्ष डॉ दिव्यांशु शेखर ने बताया कि स्वाद, सेहत और समृद्धि का अद्भुत कॉम्बो है मशरूम उत्पादन। किसान अगर खेती-बाड़ी के साथ-साथ मशरूम का उत्पादन करें तो उनके आय में अपूर्व वृद्धि हो सकती है।
डॉ दिव्यांशु ने कहा कि भारत में जलवायु विविधता होने के बावजूद कभी सिर्फ ठंड में उगाया जाने वाला मशरूम ओएस्टर, बटन, ढिगरी, पुआल दूधिया मशरूम सहित दस से अधिक प्रभेदों के कारण अब हर महीने हर मौसम में उगाया जाने लगा है।
इस अवसर पर प्रशिक्षण की संयोजक डॉक्टर पूजा कुमारी ने बताया किइस प्रशिक्षण कार्यक्रम मेंदरभंगा जिले के विभिन्न प्रखंडों से जैसे – जाले, कमतौल, दरभंगा सदर, तारडीह से 30 ग्रामीण युवक एवं युवतियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न मशरूमों को लगाने की तकनीक, उनके कंपोस्ट बनाने की तकनीक, तथा उन में लगने वाले विभिन्न बीमारियों के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी ली।
डॉ पूजा ने बताया कि भारत में उगने वाले मशरूम की दो सर्वाधिक आम प्रजातियां सफेद बटन मशरूम और ऑयस्टर मशरूम है। हमारे देश में होने वाले सफेद बटन मशरूम का ज्यादातर उत्पादन मौसमी है। इसकी खेती परम्परागत तरीके से की जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रशिक्षण से किसान एवं बेरोजगार लोग स्वरोजगार अपनाकर अपने व्यवसाय से अधिक से अधिक आमदनी प्राप्त कर सकते हैं ।साथ ही यह जानकारी भी दी कि मशरूम उत्पादन के लिए प्रशिक्षणार्थी सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता किस प्रकार प्राप्त कर सकते हैं ।
इस 5 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्रोफेसर डॉक्टर आर.पी. प्रसाद ने प्रशिक्षण के दौरान मशरूम की खेती से होने वाले फायदे के बारे में भी किसानों को अवगत कराया और बटन मशरूम की खेती केलिए कंपोस्ट बनाना, कंपोस्ट बनाने में आने वाली सावधानियां, अच्छे कंपोस्ट के गुण, केसिंग के गुण, तथा फसल की समुचित देखभाल के बारे में जानकारी दी।
इसके अलावा मशरूम फार्म संरचना, मशरूम की बीमारियां एवं कीट प्रबंधन, सूत्रकृमि एवं माइट का प्रबंधन, मशरूम व्यंजन, मशरूम के मूल्य वर्धित उत्पाद तथा डिब्बा बंद इकाई आदि विषयों को भी व्यवस्थित ढंग से बताया गया।
इसी क्रम में डॉ प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने औषधिय मशरूम की खेती कर अधिक से अधिक लाभ कमाने के विषय पर किसानों को जानकारी दी। प्रशिक्षण के क्रम में प्रशिक्षकों ने प्रशिक्षणार्थियों से अपने निर्देशन में बटन मशरूम केलिए पैकेट तैयार करवाया। कार्यक्रम में केंद्र अन्य सभी कर्मी उपस्थित रहे
