
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर। बाल विवाह मुक्त भारत के एक वर्ष पूरे होने पर 27 नवंबर को पूरे देश से बाल विवाह को उखाड़ फेंकने के उद्देश्य से पूरे देश में शुरू‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ के तहत भारत सरकार ने एक लक्षित रणनीति तय की है।
इसमें शैक्षणिक संस्थानों, उन धार्मिक स्थलों जहां विवाह संपन्न कराए जाते हैं, विवाह में सेवाएं देने वाले पेशेवर सेवा प्रदाताओं, और आखिर में पंचायतों व नगरपालिका वार्डों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ताकि बच्चों के खिलाफ इस सदियों पुराने अपराध का अंत सुनिश्चित किया जा सके।
जन प्रतिनिधियों, सरकारी विभागों, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और समुदायों का अभूतपूर्व तरीके से एक साथ आना, बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता और प्रयासों को नई ऊर्जा व रफ्तार देगा। इस समन्वय और सामूहिक संकल्प से हम जिले को साल भर के भीतर बाल विवाह मुक्त बनाने के प्रति आश्वस्त हैं।
बाल विवाह मुक्त भारत के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यशाला में जानकारी देते हुए जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव सुरेन्द्र कुमार ने उक्त बातें कही।
बाल विवाह के खिलाफ जारी अभियान को गति व मजबूती देने वाली सरकार की इस घोषणा का स्वागत करते हुए जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के सचिव सुरेन्द्र कुमार ने कहा, “यह 100 दिवसीय गहन अभियान देश की दिशा बदलने वाला साबित होगा।
बताते चलें कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार, समस्तीपुर के तत्वाधान में जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, और प्रयास के सहयोग से सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, समस्तीपुर मनोज कुमार की अध्यक्षता में जिला विधिक सेवा सदन, समस्तीपुर में बाल विवाह मुक्त भारत के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के 27 नवंबर को एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र ने स्कूलों, ग्रामीण समुदायों और अन्य संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम और पूरे जिले में जगह-जगह बाल विवाह के खिलाफ शपथ समारोह आयोजित किए।
जिसमें संगठन ने जनसमुदाय को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के बारे में भी जागरूक किया और उन्हें समझाया कि कानून के अनुसार बाल विवाह में किसी भी तरह से शामिल होने या सहायता करने वालों को इस अपराध को बढ़ावा देने के जुर्म में सजा हो सकती है।
उन्होंने बताया कि सौ दिन के इस गहन जागरूकता अभियान को तीन चरणों में बांटा गया है और इसका आखिरी चरण 8 मार्च, 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर समाप्त होगा।
इसका पहला चरण 31 दिसंबर तक चलेगा जिसमें स्कूलों, कालेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में जागरूकता के प्रसार पर जोर रहेगा।
एक जनवरी से 31 जनवरी के बीच दूसरे चरण में मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे जैसे धार्मिक स्थलों पर जहां विवाह संपन्न कराए जाते हैं, बैंक्वेट हाल, और बैंड वालों जैसे विवाह में सेवाएं देने वालों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
तीसरा और आखिरी चरण 8 मार्च तक चलेगा। इसमें बाल विवाह की रोकथाम के लिए ग्राम पंचायतों, नगरपालिका के वार्डों और समुदाय स्तरीय भागीदारी पर प्रमुखता से ध्यान दिया जाएगा।