
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क समस्तीपुर। सेवानिवृति जिम्मेदारियों, पाबंदियों व रिश्तों, का अंत नहीं। यह तो पाबंदियों व जिम्मेदारियों से भरी नियमित दिनचर्या एवं स्वच्छंद, पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियों जीवन के बीच का एक पड़ाव मात्र है।
गुरूवार को समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर में आयोजित सम्मान सह विदाई समारोह को संबोधित करते हुए प्राचार्य डाॅ मीना प्रसाद ने उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि सेवानिवृति महज कागजी प्रक्रिया है जिसका सामना हर नौकडी करने वाले को करना पडता है।
बताते चलें कि समस्तीपुर काॅलेज समस्तीपुर के सभागार में गुरूवार को सेवानिवृत शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों को समारोहपूर्वक ससम्मान भावपूर्ण विदाई दी गई। इस अवसर पर सबसे पहले प्राचार्य डाॅ मीना प्रसाद, अंग्रेजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डाॅ प्रभात कुमार सहित अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर विदाई सह सम्मान समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।
तदुपरांत सरस्वती वंदना एवं राष्ट्रीय सेवा योजना की छात्राओं के स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम परवान चढा। कार्यक्रम में सेवा निवृत हो रहे एवं पुर्व में सेवानिवृत हो चुके शिक्षकों एवं कर्मियों के अलावा स्थानांतरित प्राध्यापकों को प्रधानाचार्य डॉ प्रसाद ने मिथिला की परंपरा के अनुसार पुष्पमाला, पाग, शॅाल, गुलदस्ता एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया।
इस अवसर पर पूर्व प्राध्यापक सह अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष गणित विभाग डॉ सत्येद्र नारायण राँय, मुकेश कुमार सिंह, विमलेश कुमार सिंह, प्रोफेसर निर्मल सिंह, प्रोफेसर उमा सिंहा, प्रोफेसर अरविंद कुमार सिंह, डॉ सच्चिदानंद तिवारी, डॉ मदन मोहन झा, क्रांति कुमार, प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह, डॉ रघुनंदन प्रसाद सिंह, डॉ अरविंद कुमार, रामाश्रय राय को भावपूर्ण विदाई दी गई।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य डॉ. प्रसाद ने पूर्ववर्ती महाविद्यालय कर्मियों व प्राध्यापकों के योगदान को याद किया और कहा कि आज जिन लोगों को हम सम्मानित कर रहे हैं उनका संस्था की नींव को मजबूत करने से लेकर जिले के शीर्ष शिक्षण संस्थान के रूप में प्रतिष्ठित करने में अमूल्य योगदान रहा है।
इस दौरान सेवा निवृत शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने भी अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया और कहा कि हमने अपने जीवन के महत्वपूर्ण पल यहां बताएं हैं जो हमारे जीवन के अनमोल धरोहर हैं। आज वे तमाम पल एक बार फिर चलचित्र की मानिन्द आंखों के आगे घूम रहे हैं। ये वे पल हैं जिन्हें याद कर मन गर्वानुभूति व आनन्दातिरेक से भर जाता है।
मंच संचालन प्रो. महेश कुमार चैधरी एवं डॉ.राहुल मनहर ने संयुक्त रूप से किया। डॉ. दयानंद मेहता के धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्र-गान के साथ समारोह का समापन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, छात्र-छात्राओें सहित समस्त महाविद्यालय परिवार उपस्थित रहा।