किसान भाईयों केलिए समसामयिक सुझाव
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। आने वाले दिनों में तापमान में वृद्धि होने की संभावना है। इसे देखते हुए, किसान भाईयों को अपने सब्जियों की फसलों की सिंचाई करने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से, मटर, टमाटर, बैगन, मिर्च, प्याज और पत्ता गोभी जैसी सब्जियों की फसलों को पानी की आवश्यकता होती है। इन फसलों में सिंचाई करने से न केवल उनकी वृद्धि और विकास में मदद मिलेगी, बल्कि तापमान में वृद्धि के कारण होने वाले नुकसान से भी उन्हें बचाया जा सकता है। किसानों से अनुरोध है कि वे अपनी फसलों की सिंचाई करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
– अगात बोयी गई गेहूँ की दाना बनने से दुध भरने की अवस्था वाली फसल में प्रयाप्त नमी का विशेष ध्यान रखें। इस अवस्था में नमी की कमी रहने से उपज में कमी आती है।
– बसंतकालीन मक्का की बुआई करें। जुताई से पूर्व खेतों में प्रति हेक्टेयर 15-20 टन गोबर की खाद, 40 किलोग्राम नेत्रजन, 40 किलोग्राम सल्फर एवं 30 किलोग्राम पोटास का व्यवहार करें। बुआई के लिए सुवान, देवकी, गंगा 11, शक्तिमान 1 एवं 2 किस्में अनुशंसित है। बीज दर 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें। प्रति किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम थीरम या कैप्टाफ द्वारा उपचारित कर बुआई करें। रवी मक्का की धनबाल व मोचा निकलने से दाना बनने की अवस्था वाली फसल में प्रयाप्त नमी बनाए रखें।
– गरमा मौसम की सब्जियों की बुआई करते चलें। 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर खाद की मात्रा पूरे खेत में अच्छी प्रकार विखेरकर मिला दें। कजरा (कटुआ) पिल्लू से होने वाले नुकसान से बचाव हेतु खेत की जुताई में क्लोरपायरीफॉस 20 ई०सी० दवा का 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से 20-30 किलो बालू में मिलाकर व्यवहार करें। सब्जियों में निकाई-गुड़ाई एवं सिंचाई करें।
