
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क पूसा। डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के परिसर स्थित विद्यापति सभागार में छात्रों के ग्रामीण उद्यमिता जागरूकता विकास योजना विषय पर आधारित एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तहत छात्रों को ग्रामीण क्षेत्र में कृषि की स्थिति एवं फसलों में किसानों की होने वाली समस्याओं को समझने के लिए भेजा जाता है। यह कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों के सिलेबस का एक भाग है। इस कार्यक्रम के तहत छात्र इंडस्ट्रियल संस्थानों में भी जाते हैं और उद्यमिता का प्रशिक्षण लेते हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीएस पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय इस कार्यक्रम को पूरी गंभीरता से लागू करना चाहता है जिससे किसान और छात्र दोनों को लाभ हो।
उन्होंने कहा कि आज के सेमिनार में इस योजना के विभिन्न आयामों के बारे में विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों को साथ साथ छात्रों ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि छात्र रूरल एंटरप्रेन्योरशिप अवेयरनेस डेवलपमेंट योजना कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा कृषि और संबद्ध विज्ञान में स्नातक छात्रों के बीच उद्यमिता और व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत छात्रों में उद्यमशीलता कौशल और ज्ञान विकसित करने पर जोड़ दिया जाना चाहिए ताकि वे जॉब सीकर (नौकरी खोजने वाले) नहीं जॉब प्रोवाइडर (नौकरी देने वाले) बनें।
टीसीए ढोली के अधिष्ठाता डॉ पीपी सिंह ने कहा कि इस योजना की शुरुआत कुलपति डॉ पी एस पांडेय के द्वारा ही देश भर में की गई थी जब वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में सहायक महानिदेशक के रूप में कार्य कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कुलपति डॉ पांडेय विश्वविद्यालय में इस योजना को अक्षरसः लागू करने को लेकर लगातार सक्रिय हैं। आधारभूत एवं मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ अमरेश चंद्रा ने इस कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से चर्चा की।
पीजी सीए डीन डॉ मयंक राय ने कहा कि इस कार्यक्रम से छात्रों में व्यावहारिक कौशल और तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ावा मिलता है और वे वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान करने के लिए बेहतर तरीके से सक्षम बनते हैं।
फिशिरीज कालेज के डीन डॉ पी पी श्रीवास्तव ने कहा कि यह योजना छात्रों को ग्रामीण वास्तविकताओं, चुनौतियों और अवसरों से परिचित कराता है।
उन्होंने अपने महाविद्यालय में चल रहे विभिन्न कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी। इंजीनियरिंग कॉलेज डीन डॉ राम सुरेश वर्मा ने कहा कि इस योजना की उचित निगरानी तंत्र को विकसित करने की आवश्यकता है ताकि कोई इस योजना में गड़बड़ी न कर सके।
वानिकी एवं उद्यानिकी महाविद्यालय के डीन डॉ आर के झा ने कार्यक्रम को और बेहतर बनाने को लेकर अपने सुझाव दिये। ग्रामीण उद्यमिता विकास योजना के तहत छात्रों को 3,000 रुपया की मासिक छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है, जिसमें से 2,500 रुपया आईसीएआर से और 500 रूपया राज्य सरकार से मिलता है।
मौके पर डॉ महेश कुमार, डॉ नितेश कुमार शर्मा, डॉ केएल भूटिया, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।