
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर । ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा आचार्य नरेंद्र देव महाविद्यालय, शाहपुर पटोरी में आयोजित राज्यस्तरीय छह दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन दो अहम विषयों पर केंद्रित विचारगोष्ठियाँ आयोजित की गईं।
पहले सत्र में प्रख्यात शिक्षक और चिंतक रवींद्रनाथ राय ने “मार्क्सवादी दर्शन” पर विस्तार से प्रकाश डाला। अपने संबोधन में श्री राय ने कहा कि “मार्क्सवाद केवल राजनीतिक मत नहीं, बल्कि समाज, इतिहास और मानव अस्तित्व को समझने का वैज्ञानिक औजार है। उन्होंने मानव सभ्यता की उत्पत्ति को भूख और श्रम के संघर्ष से जोड़ते हुए कहा कि विचार और चेतना का विकास मनुष्य के भौतिक अस्तित्व और सामाजिक संबंधों की उपज है।
श्री राय ने कहा कि पत्थर को हथियार बनाकर प्रारंभिक मानव ने श्रम और सामूहिकता के आधार पर समाज का निर्माण किया। उन्होंने कृषि, पशुपालन और तकनीकी विकास को सामाजिक परिवर्तन की निर्णायक घटनाएँ बताया। भाप इंजन की खोज को उन्होंने उत्पादन प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत माना।
उन्होंने जोर देकर कहा “समाज में हर बड़ा परिवर्तन, हर विचार और ज्ञान, आर्थिक संरचना की कोख से जन्म लेता है। छात्रों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने मार्क्सवादी पद्धति को आज की दुनिया को समझने का सबसे सटीक तरीका बताया।
दूसरे सत्र में शिक्षाविद् प्रो. अरुण कुमार ने भारत में शिक्षा का विकास एवं चुनौतियाँ विषय पर गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में प्रो. अरुण ने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था समाज में वर्ग, जाति और लिंग आधारित असमानता को और गहरा कर रही है।
उन्होंने शिक्षा के ऐतिहासिक विकास की चर्चा करते हुए बताया कि प्राचीन काल में शिक्षा सवर्णों तक सीमित रही, मध्यकाल में धार्मिक शिक्षा हावी रही, और औपनिवेशिक काल में मैकाले की नीति ने शिक्षा को मानसिक गुलामी का माध्यम बना दिया।
उन्होंने कहा कि संविधान ने भले ही समान शिक्षा का वादा किया, लेकिन 1991 के बाद नवउदारवादी नीतियों ने शिक्षा को बाजार के हवाले कर दिया। आज शिक्षा एक ‘जन अधिकार’ नहीं, बल्कि बिकाऊ वस्तु बन गई है दृ जिसे सिर्फ आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग ही खरीद सकता है।
प्रो. अरुण ने जातिगत भेदभाव, महिला शिक्षा में असमानता, मातृभाषा की उपेक्षा और शिक्षा के भगवाकरण पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा विज्ञान और तर्क की जगह पौराणिकता और अंधविश्वास को बढ़ावा दे रही है।
सत्र के समापन पर एआईएसएफ नेताओं ने वैकल्पिक, न्यायपूर्ण और जनपक्षीय शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा दृयदि शिक्षा मुट्ठी भर लोगों की बपौती बनी रही, तो समाज कभी बराबरी का सपना नहीं देख सकेगा। यह लड़ाई केवल डिग्री की नहीं, चेतना और अधिकार की भी है।
इस अवसर पर एआईएसएफ राज्य अध्यक्ष सुधीर कुमार, राज्य सचिव अमीन हमजा, समस्तीपुर जिला अध्यक्ष दीपक कुमार धीरज, जिला सह-सचिव अभिषेक आनंद, जिला उपाध्यक्ष श्याम किशोर सहित अनेक पदाधिकारी एवं छात्र कार्यकर्ता मौजूद रहे।