
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। ’लकवा’ गठिया की एक जटिल व त्रासद स्थिति है, जिसके कारण, लक्षण और परिणाम अलग-अलग होते हैं। चेतावनी के संकेतों को जल्दी पहचानने, सही निदान और समय पर इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है। जिससे कामकाज और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शहर के आदर्श नगर स्थित श्री रामचंद्र अस्पताल के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने रविवार को संवाददाता से बातचीत के दौरान उक्त बातें कही।
गर्मियों में शरीर को ठंडा रखना, हाइड्रेटेड रहना जरूरी :
उन्होंने बताया कि, गर्मी के मौसम में गठिया, लकवा और नस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अत्यधिक गर्मी नसों में सूजन और जोड़ों के दर्द को बढ़ा सकती है। इसलिए इससे बचने के लिए शरीर को ठंडा रखना, हाइड्रेटेड रहना और सही दिनचर्या अपनाना बहुत जरूरी है।
जोड़ों को हिलाने में कठिनाई होना गठिया रोग का संकेत :
डॉ. सिंह ने बताया कि, गठिया पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करता है। समय रहते समुचित इलाज न कराने पर यह समय के साथ लगातार बिगड़ सकती है। जितनी जल्दी हो सके अपने चिकित्सक से उपचार कराने से जोड़ों को स्थायी क्षति से बचाया जा सकता है। जोड़ों को हिलाने में कठिनाई होना गठिया रोग का संकेत हो सकता है।
प्रकार और प्रभाव :
उन्होंने बताया कि, आर्थराइटिस (गठिया) जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न पैदा करने वाली स्थितियों का एक समूह है, जिसके 100 से अधिक प्रकार होते हैं। इनमें कुछ मुख्य प्रकार उल्लेखनीय हैं। यथा,
– ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis – OA) : यह सबसे आम प्रकार है, जो उम्र के साथ जोड़ों के कार्टिलेज (उपास्थि) के टूटने के कारण होता है। यह मुख्य रूप से घुटने, कूल्हे और रीढ़ को प्रभावित करता है। यह सबसे अधिक पायी जाने वाली परेशानी है। जो समय के साथ आघात अवशोषक उपास्थि के घिसने के कारण होती है। यह बीमारी उम्र के साथ बिगड़ती जाती है।
– रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis – RA) : यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों के ऊतकों पर हमला करती है, जिससे सूजन और दर्द होता है।
– गाउट (Gout) : यह जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा होने के कारण होता है। जिससे आमतौर पर पैर के अंगूठे में अचानक तीव्र दर्द और सूजन होती है।
– सोरायटिक आर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis) : यह सोरायसिस (त्वचा रोग) से पीड़ित लोगों को प्रभावित करता है, जिसमें जोड़ों में दर्द और सूजन होती है।
– जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (Juvenile Idiopathic Arthritis – JIA) : यह 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होने वाला सबसे आम गठिया है।
– एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस (Ankylosing Spondylitis) : यह मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और पीठ के निचले हिस्से के जोड़ों को प्रभावित करता है, जिससे रीढ़ में अकड़न आ सकती है।
पसीना आने से मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन और मरोड़ :
डॉ. सिंह ने कहा कि, हीट क्रैम्प्स, गर्मी से होने वाली बीमारी का सबसे हल्का रूप है। गर्मी के कारण नसें फैल जाती हैं, जिससे उनका ठीक से काम करना और भी मुश्किल हो जाता है और खून नसों में ही जमा रहने लगता है। जिस कारण तीव्र व्यायाम और अत्यधिक गर्मी में पसीना आने से मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन और मरोड़ उत्पन्न होता है।
लक्षणों दिखे या महसूस हो तो चिकित्सक से करें संपर्क :
वैरिकोज वेन्स पहले से ही दिखने में गहरे रंग की और उभरी हुई होती हैं और इनके कारण पैरों में दर्द, खुजली और भारीपन भी हो सकता है। ऐसे में, अतिरिक्त गर्मी इस समस्या को और भी बढ़ा देती है। यदि शुरुआत में ही समुचित ईलाज किया जाए तो गठिया ठीक हो सकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि, यदि आपको बहुत अधिक दर्द या पैरों में काले निशान या कोई अन्य लक्षण दिखाई दें या महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें यह गठिया का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है।