
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 ओईनी। मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए। फिल्म उमराव जान के इस गीत को देखें तो एक उक्ति याद आती है, जिसमें किसी ने कहा है कि, अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा, लक्ष्य पाने की जिद्द, लगन और प्रतिबद्धता हो तो, ऊंची उड़ान भरने से कोई नहीं रोक सकता। इसी जज्बे को सच कर दिखाया है समस्तीपुर के पूसा प्रखंड स्थित ओईनी निवासी रविन्द्र झा एवं वीणा देवी के पुत्र सुमित कुमार ने।
कड़ी मेहनत और निरंतरता का परिणाम :
सुमित ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की प्रतिष्ठित लेवल-3 कोचिंग सर्टिफिकेशन एलिजिबिलिटी परीक्षा को ‘डिस्टिंक्शन’ के साथ उत्तीर्ण कर न केवल अपने जिले, बल्कि पूरे बिहार का परचम राष्ट्रीय स्तर पर लहराया है। सुमित की यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत और निरंतरता का परिणाम है।
2019 में बैच टॉपर रहे हैं सुमित :
इससे पूर्व वर्ष 2019 में बीसीसीआई के लेवल-1 कोर्स में वे अपने बैच के टॉपर रहे थे। इसके बाद वर्ष 2023 में आयोजित लेवल-2 कोर्स में भी उन्होंने टॉप-4 में स्थान पक्का कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें लेवल-3 एलिजिबिलिटी टेस्ट में बैठने का मौका मिला, जिसे उन्होंने 2 मार्च 2026 को बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बेंगलुरु में सफलतापूर्वक क्वालीफाई किया।
अपनी प्रतिभा और अटूट श्रम से किया साबित : बिहार में प्रतिभा नहीं कम
गौरतलब हैं कि बीसीसीआई का लेवल-2 व लेवल-3 सर्टिफिकेशन क्रिकेट कोचिंग जगत के सबसे कठिन और उच्च स्तर के पड़ावों में से एक माना जाता है। इस स्तर तक पहुँचने के लिए खेल की गहरी समझ, तकनीकी बारीकियां और वर्षों के अनुभव की आवश्यकता होती है। सुमित ने अपनी प्रतिभा और अटूट मेहनत के बल पर इस मुकाम को हासिल कर यह साबित कर दिया कि बिहार की प्रतिभा किसी से कम नहीं है।
7 ओवर में 9 रन देकर 9 विकेट लेने का अनोखा रिकॉर्ड :
पिता रविंद्र झा और माता वीणा देवी के पुत्र सुमित का बचपन से ही क्रिकेट से गहरा लगाव रहा है। उन्होंने खिलाड़ी के रूप में अपने करियर की शुरुआत समस्तीपुर के रॉयल इंस्टिट्यूट क्रिकेट क्लब से की थी। उनके नाम जिला लीग के एक मैच में मात्र 7 ओवर में 9 रन देकर 9 विकेट लेने का अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। विश्वविद्यालय स्तर पर भी उन्होंने अपनी गेंदबाजी और कप्तानी से अलग पहचान बनाई।
बिहार सीनियर महिला क्रिकेट टीम के हेड कोच हैं सुमित :
एक समय ऐसा भी आया जब सुमित अपने करियर के बेहतरीन फॉर्म में थे, लेकिन उसी दौरान बिहार में क्रिकेट गतिविधियां करीब दो दशकों के लिए ठप पड़ गईं। इस कठिन दौर ने कई खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ा, लेकिन सुमित का जुनून कम नहीं हुआ। उन्होंने हार मानने के बजाय कोचिंग को अपना मिशन बनाया और आज उसी लगन ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है। वर्तमान में सुमित बिहार सीनियर महिला क्रिकेट टीम के हेड कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अधिक से अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तराश कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना है लक्ष्य :
उनके कुशल मार्गदर्शन में बिहार की टीम ने ‘सीनियर विमेंस वन डे ट्रॉफी’ के प्लेट ग्रुप के सभी छह मैच जीतकर इतिहास रच दिया और पहली बार ग्रुप चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। सुमित का कहना हैं कि ” क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। उनका लक्ष्य बिहार के अधिक से अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तराश कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना है।”
जिले के खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में खुशी की लहर :
सुमित ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, बिहार क्रिकेट एसोसिएशन व अपने कोचों और शुभचिंतकों को दिया है। उन्होंने बताया कि वे भविष्य में अंपायरिंग की बारीकियों को भी सीखेंगे ताकि खेल की तकनीकी समझ और बेहतर हो सके। सुमित की इस उपलब्धि पर बिहार क्रिकेट जगत, जिले के खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में खुशी की लहर है। सभी ने इसे समस्तीपुर और बिहार के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण बताया है।