
तीन सदस्यीय कमिटी के माध्यम से आयोग रखेगा चिकित्सकों की लिखावट पर नजर।
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क नई दिल्ली। दवा के पुर्जे पर अस्पष्ट लिखावट नहीं चलेगी। जिससे अब डॉक्टरों को पर्चा पर दवा का नाम साफ-साफ बड़े (कैपिटल) अक्षरों में लिखना होगा। अभी हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश देते हुए उक्त बातें कही है। साथ ही एनएमसी ने चिकित्सकों को अस्पताल में जेनरिक दवा ही लिखने के निर्देश भी दिए हैं।
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने व्यक्ति के स्वास्थ्य के अधिकार के तहत यह बड़ी पहल करते हुए अपने उक्त निर्देश में कहा है कि, चिकित्सकों द्वारा लिखे गए दवा एवं जांच के नाम पढ़ने में मरीज के परिजनों को परेशानी होती है, कई बार दवा विक्रेता भी दवा का नाम पढ़ने में असमर्थ होते हैं। इसलिए डॉक्टर जो भी दवा मरीजों को लिखें वह साफ अक्षरों में हो, ताकि उसे पढ़ने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो। आड़ी-तिरछी और अस्पष्ट लिखावट अब नहीं चलेगी।
एनएमसी मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार डॉक्टरों की लिखावट पर नजर रखने के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों में तीन सदस्यीय कमेटी बनाए जाने का निर्देश दिया गया है। यह कमेटी यह सुनिश्चित करेगी कि पर्चे पर डॉक्टर साफ-साफ दवाओं और जांच के नाम लिख रहे हैं या नहीं।
एनएमसी ने सभी आयुर्विज्ञान संस्थानों को निर्देश दिया है कि डॉक्टरों की हैंडराइटिंग पर नजर रखने के लिए जो कमेटी का गठन करें, उसमें तीनों सदस्य फार्मेसी और मेडिसिन विभागों के होने चाहिए।
यह कमेटी ओपीडी में भी जाकर डॉक्टरों को साफ अक्षरों में दवाओं के नाम पर्चे पर लिखने के लिए हिदायत देती रहेगी। समय समय पर बैठक कर किस डॉक्टर में कितना सुधार हुआ उसका रिकार्ड तैयार करेगी और एनएमसी को अपनी रिपोर्ट भी भेजेगी। जिससे एनएमसी यह जान सकेगा कि डॉक्टरों की लिखावट में किस तरह के सुधार हुए हैं।