
ओईनी न्यूज नेटवर्क
सुभाषचन्द्र कुमार।
समस्तीपुर/पूसा । बिहार से कुपोषण और गरीबी मिटाने के लिए मशरूम उत्पादन व्यवसाय एक मजबूत एवं विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित हो चुका है। बस अब इस व्यवसाय को गति देने की जरूरत है। जिससे देश स्तर के उत्पादकता दर को बढ़ाया जा सके। डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च के सभागार में मशरूम उत्पादन सह प्रसंस्करण विषय पर एफपीओ मॉडल प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। जिसके उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए मशरूम विभाग के प्रभारी वैज्ञानिक डाॅ आरपी प्रसाद ने उक्त बातें अपने संबोधन में कही।

उन्होंने कहा कि देश भर में मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में बिहार प्रथम पायदान पर खडा है। अब ग्रामीण परिवेश में बसर करने वाले लोगों के साथ मिल कर, एक मुहिम के रूप में इसके व्यवसायीकरण करने की जरूरत है।


वहीं सुविख्यात मशरूम विशेषज्ञ डाॅ दयाराम ने कहा कि मशरूम एवं स्पाॅन उत्पादन, उत्पादों का निर्माण तथा इनको ससमय समुचित बाजार तक पहुंचाने की आवश्यकता है। जिससे रोजगार के सृजन के साथ साथ किसानों के आय में वृद्धि संभव हो सके। मशरूम मैन डाॅ दयाराम ने कहा कि स्वस्थ एवं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर समाज के निर्माण के बाद ही विकसित भारत की परिकल्पना की जा सकती है। इसमें मशरूम बडी और अहम भूमिका निभा सकता है।

डाॅ दयाराम ने बताया कि मशरूम उत्पादन के व्यवसायीकरण के लिए इससे बने उत्पाद अचार, लड्डू, बिस्किट, समोसा, नमकीन एवं पकौड़ा आदि को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन बाजार से जोड़कर उत्पादकों की दिशा एवं दशा में परिवर्तन लाया जा सकता है।
प्रशिक्षण के इस सत्र में बीज निर्माण से संबंधित प्रयोगात्मक सत्र को भी बेहतर रूप से सजाया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद शिक्षा विभाग के माध्यम संचालित इस प्रशिक्षण में जिले से कुल 30 चयनित किसान हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन मशरूम वैज्ञानिक डा सुधानंदनी ने की। मौके पर विभाग से जुड़े कर्मियों में सुभाष कुमार, निशा, मुन्नी आदि मौजूद थे।
