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ओईनी24 डेस्क समस्तीपुर । पीड़ा से कराहते, हर पल मृत्यु को महसूस करते आये लोगों को पीड़ा मुक्त कर उनके चेहरों पर मुस्कान और नये जीवन की खुशी प्रदान करने वाले, अहर्निशं सेवामहे को जीवंतता प्रदान करने वाले डॉक्टरों की निस्वार्थ सेवा को सम्मानित करने का अवसर है डाॅक्टर्स डे।
उक्त बाते अपोलो डेंटल मै आयोजित निशुल्क चिकित्सा शिविर में अपोलो डेंटल के प्रबंध निदेशक डॉ ज्ञानेंद्र कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि, पूरी दुनिया में हर साल 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। डाॅ विधानचंद्र राॅ के सम्मान में आयोजित यह दिन चिकित्सकों के अथक प्रयासों, निस्वार्थ समर्पण, निश्छल सेवा और समाज के प्रति उनकी अमूल्य सेवाओं की सराहना करने का एक विशेष अवसर है। चिकित्सा को नोबल पेशे के रूप में जाना जाता है और चिकित्सकों को समाज में भगवान का दर्जा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सक से पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री तक का सफर तय करने वाले डाॅ बिधान चंद्र राॅय के जन्म दिन पर मनाया जाने वाला यह दिन, समाज को याद दिलाता है कि चिकित्सक हमेशा मरीजों के इलाज के लिए अपना पराया, अमीर गरीब आदि संकीर्ण सोच से उपर उठ कर तटस्थ व निःस्वार्थ बिना अपनी व अपने परिवार की फिक्र किये खड़े रहते है। हम देख चुके है कोविड-19 महामारी जैसे संकटों में डॉक्टरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लाखों लोगों की जान बचाई थी।
डाॅ ज्ञानेंद्र ने कहा कि आज का दिन स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुधार, चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने और डॉक्टरों की समर्पित सेवा के लिए जागरूकता बढ़ाने केलिए प्रेरित करता है।
इस अवसर पर समस्तीपुर डेंटल के चिकित्सक डॉक्टर दयानंद कुमार ने बताया कि हर वर्ष साल में डॉक्टर्स डे का थीम होता है 2025 का थीम है- “बिहाइंड द मास्क हु हिल्स द हीलर” इस थीम का अर्थ है कि डॉक्टर, जो खुद मास्क के पीछे रहकर हमेशा दूसरों के तकलीफ को ठीक करने में लगे रहते है, अक्सर खुद अपनी भलाई को नजरअंदाज कर देते है। विश्व चिकित्सक दिवस सिर्फ महामारी जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि हर दिन गांव, कस्बों से शहर तक सभी मेडिकल प्रोफेशनल्स की भूमिका को सार्वजनिक स्वीकृति देता है।
यह दिन सामान्य चिकित्सकों से लेकर विशेषज्ञों और सर्जनों तक, उन सभी डॉक्टरों का सम्मान करता है जिन्होंने सेवा और उपचार की शपथ ली है। यह स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र निर्माण में, चिकित्सकों के अथक अहर्निश योगदान को स्वीकार करने का दिन है।
इस आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने में डॉ फारूक आजमी, डॉ दयानंद कुमार, डॉ मोहन आनंद, डॉ प्रभात रंजन, धर्मदेव यादव, सुजीत कुमार, शबनम कुमारी, गोविंद मोहन आदि ने सहयोग किया।