
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क समस्तीपुर । बिजली विभाग के निजी करण के बाद आम जन में यह संदेश गया था कि बिजली की स्थिति में सुधार होगा। किन्तु जो मौजूदा हालात हैं उसमें यही कहा जा सकता है कि सिर्फ मकान बदला है लोग वहीं किरदार भी वही है। हलांकि इसमें कोई शक नहीं कि मुख्यमंत्री नितीश कुमार के वादों के अनुरूप प्रयासों से बिजली की उपलब्धता बढी है। किन्तु जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति कुछ अलग है।
समस्तीपुर जिले के पूसा प्रखंड के कई गाँवों में हल्की बारिश होते ही बिजली आपूर्ति घंटों के लिए ठप हो जाती है। यहां हाल यह है कि हल्की तेज हवा चली या हल्की बारिश हो तो सबसे पहले बिजली ही गायब होती है। अगर तेज हवा चल गई या आंधी पानी की बात हो तो लोगों के ओठों पर एक ही सवाल तैरता नजर आता है जाने कब आयेगी अब बिजली।
इतना ही नहीं अधिक ठंड पडी तो बिजली गायब, अधिक गर्मी पडी तो भी बिजली गायब। बिजली उपलब्धता के इस अनिश्चितता का परिणाम है कि इससे न केवल आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती और छोटे व्यवसायों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
डिजीटलाईजेशन के इस दौर में जब 70 प्रतिशत जीवन विद्युत चालित उपकरणों पर आश्रित हो रहे हों ऐसे में बिजली की उपलब्धता में अनिश्चितता से जीवन की मुश्किलों की सहज कल्पना की जा सकती है। बहरहाल इस हालात में सरकार की हर घर बिजली और 24 घंटे आपूर्ति जैसे दावे सवालों के घेरे में है।
इस स्थिति से त्रस्त मलिकौर गाँव के निवासी रामजी कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, ऊर्जा मंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर स्थायी और जलरोधी विद्युत आपूर्ति प्रणाली सुनिश्चित करने की माँग की है।
उनके मुताबिक, हर महीने सख्ती से वसूली किए जाने के बावजूद बिजली की आपूर्ति आज भी जर्जर तारें व खंबो के भरोसे है। ऐसा लगता है जैसे बिजली की तारें धातु की नहीं कागज की बनी हों, जो हल्की सी बारिश में ही गल जायेंगी। विभागीय अधिकारी निजीकरण होने के बाद भी शिकायतें सुनने को तैयार नहीं, लेकिन हर महीने फिक्स चार्ज समय पर वसूला जाता है।