
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 जाले। “बकरी पालन और कुक्कुट पालन ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलंबन का बेहतर विकल्प है। जिसे लोग या तो एकल व्यवसाय के रूप में शुरू कर सकते हैं या फिर खेती-बाड़ी के साथ अपना कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं ।”
कृषि विज्ञान केंद्र जाले में ‘उन्नत बकरी पालन एवं उन्नत मुर्गी पालन’ विषयक पांच दिवसीय प्रशिक्षण के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केवीके जाले अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि, “इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बकरी एवं मुर्गी पालकों को जागरूक करना और उन्हें इस विषय में नई तकनीक के बारे में प्रशिक्षत करना है।”
बताते चलें कि कृषि विज्ञान केन्द्र, जाले, दरभंगा में प्रमाण पत्र वितरण के साथ “उन्नत बकरी पालन एवं उन्नत मुर्गी पालन” विषयक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को प्रमाण पत्र वितरण के साथ संपन्न हो गया।
इन पाँच दिनो में विशेषज्ञों ने प्रशिक्षणार्थियों को बकरी पालन एवं कुक्कुट पालन से जुड़े तमाम तकनीकी पहलुओं, उनके रख–रखाव, समुचित देखभाल, आवासन, टीकाकरण आदि का प्रशिक्षण दिया गया।
छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों के लिए एक उपयुक्त व्यवसाय :
अतिथियों को स्वागत, अभिनंदन और उद्घाटन की औपचारिकता के बाद अपने संबोधन में प्रशिक्षण संयोजक डॉ. पूजा कुमारी ने अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, बकरी पालन के लिए कम पूंजी और छोटे स्थान की आवश्यकता होती है, जिससे यह छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों के लिए एक उपयुक्त व्यवसाय बन जाता है।
कारण :
उन्होंने बताया कि, “बकरियों का मांस, दूध, और खाल बाजार में अच्छी कीमतों पर बिकते हैं, जिससे बकरी पालन से अच्छी कमाई हो जाती है। केंद्र और राज्य सरकारें बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी, प्रशिक्षण सहित अन्य सहायता भी प्रदान करती हैं.”
टीकाकरण :
इस दौरान टी.भी.ओ. कमतौल डॉक्टर सुनील कुमार सिंह, ने प्रशिक्षणार्थियों को बकरियों में पाई जाने वाली विभिन्न बीमारियों तथा उनके टीकाकरण के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
ऋण योजनाएं व सब्सिडी :
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में इंडियन बैंक की जोनल मैनेजर डॉ. प्रेरणा कुमारी ने प्रशिक्षणार्थीयों को किसानों के लिए उपलब्ध विभिन्न ऋण योजनाओ के बारे मे जानकारी दी।
वैज्ञानिकों ने दी जानकारी :
इसी क्रम में वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र सुखेत, मधुबनी डॉ. एस के गंगवार ने बकरियां एवं मुर्गियों में पाए जाने पाए जाने वाले मुख्य रोग एवं उनके रोकथाम, टी.भी.ओ., जाले डॉ. शिवेंद्र कुमार ने टीकाकरण एवं वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, केवीके, सरैया डॉ. आर.के. राय ने बकरियों एवं मुर्गियों के लिए पोषक तत्व युक्त व शीघ्र वजन बढ़ाने वाले अनाजों के विषय में जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने अच्छे नस्ल की बकरियों के विषय में भी विस्तृत जानकारी दी।
किसने क्या कहा :
असिस्टेंट प्रोफेसर, एनिमल साइंस, डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा डॉक्टर गोंड ने किसानों से परिचर्चा के दौरान बकरी और कुक्कुट में विभिन्न रोगों के लक्षण, उनका व्यवहार तथा उनका निदान के बारे में बताया । वहीं उद्यान विशेषज्ञ डॉ प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने समेकित कृषि प्रणाली के विषय में जानकारी दी। फॉर्म मैनेजर डॉ. चंदन कुमार ने प्रशिक्षणार्थीयों को कृषि विज्ञान केंद्र का भ्रमण करवाया ।
कुल 87 प्रशिक्षु हुए शामिल :
इस बाबत जानकारी देते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉ. पूजा कुमारी ने बताया कि बकरी पालन प्रशिक्षण में जाले, जोगियारा, दोघड़ा, रेवढ़ा, अलीनगर, तारालाही, कमतौल, बंधौली, बौराम, पिठरिया, कठासा, मिल्की, कतरौल,सिंघवारा, भरवारा आदि से 45 ग्रामीण युवक–युवितियों ने भाग लिया। वहीं मुर्गी पालन में रेवढ़ा, देवरा, केवटी, राढ़ी, ब्रहमपूरा, सनहपूर इत्यादि से 42 ग्रामीण युवक–युवतियों ने भाग लिया।
कई वैज्ञानिक व शोधार्थी थे मौजूद :
प्रमाण पत्र वितरण के दौरान केंद्र के पूर्व गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉक्टर सीमा प्रधान, डॉ पूजा कुमारी, वरीय शोधकर्ता निकरा परियोजना, तथा संजीव कुमार, अभय कुमार, मनीष कुमार, अमरंजय कुमार एवम् अमन कुमार उपस्थित रहे ।