
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
ओईनी । बाबा दिगंबर नाथ महादेव मंदिर परिसर में महाशिव रात्री के अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अहले सुबह से ही जलाभिषेक को लेकर तथा मन्नत मांगने उतारने वालों का सिलसिला आरंभ हो गया। जो देर शाम तक चलता रहा। इस अवसर पर मंदिर परिसर में एक अखण्ड नाम संकीर्तन अष्ठयाम महायज्ञ का भी आयोजन किया गया जिससे पूरा इलाका भक्ति में सराबोर हो गया।

जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम एवं पूसा प्रखंड मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दक्षिण दिशा में पूसा पटना पथ अवस्थित गांव है दिगम्बरा। जहां स्थापित हैं सर्व मनोकामना सिद्धि का प्राचीनतम केन्द्रों में एक स्वयंभू शिवलिंग बाबा दिगम्बर नाथ महादेव मंदिर।मनोकामना सिद्धी धाम के रूप में ख्याति दूर-दूर तक है।
हलांकि इस स्थान के स्थापना की प्राचीनता को लेकर कोई साक्ष्य या अभिलेख तो उपलब्ध नहीं है मगर दंतकथाओं, नागर शैली में निर्मित मंदिर के गर्भ गृह एवं भगवान शिव के विग्रह की आकृति के अनुसार अनुमान लगाया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना गुप्त काल के आसपास हुई होगी।
ग्रामीण बताते हैं कि अंग्रेजी हुकूमत के पुर्व से ही एक पूर्ण राजस्व ग्राम दिगम्बरा के चौर में यह मंदिर स्थापित है। जहां पहले सिर्फ गर्भ गृह ही था। इतिहास के जानकार बताते हैं कि मंदिर की आकृति नागर शैली की है मगर, सिर्फ मंदिर का गर्भ गृह होना इसके स्थापत्य कला के काल निर्धारण पर संशय उत्पन्न कर सकता है। किन्तु मंदिर के जीर्णोद्धार करने वाले मजदूरों के मुताबिक निर्माण के दौरान जमीन के नीचे जो ढांचा दिखा उससे प्रतीत होता है कि मुगल आक्रांताओं का प्रकोप इस मंदिर को भी झेलना पडा था। गर्भ गृह को क्षति नहीं पहुंचाया जा सका था।
पुर्व जिलापार्षद व भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के जिला संयोजक संजय कुमार सिंह बताते हैं कि बियाबान में होने के कारण यह मंदिर वर्षों तक उपेक्षित रहा। मगर दूर-दराज से श्रद्धालू यहां जलाभिषेक व पूजा अर्चना करने आते रहे हैं। 80-90 के दशक में शिव भक्तों के सहयोग से इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। धीरे धीरे दिगम्बर नाथ महादेव मंदिर को वर्तमान स्वरूप दिया जा सका है।
श्री सिंह बताते हैं कि यहां आने वाले अन्य जिलों के श्रद्धालुओं से ही इस स्थान को मनोकामना सिद्धि स्थान के रूप में पहचान और प्रतिष्ठा मिली है। इस स्थान की प्रसिद्धि इतनी दूर तक है कि सीतामढी, सहरसा, मुंगेर, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी आदि जिले से ही नहीं पडोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु प्रत्येक वर्ष यहां आकर शिव का अभिषेक करते हैं और अपनी मन्नत मांगते और उतारते हैं।

कुछे लोगों का कहना है कि बाबा दिगम्बर नाथ महादेव का यह मंदिर मैथिल कुल भूषण महाकवि विद्यापति, व ओईनवार वंश के महाराजा शिवसिंह व महारानी लखिमा दई द्वारा संरक्षित, सेवित, व पूजित है।