
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद की 382वीं गूगल बैठक में पाणिनि जयन्ती को अंतरराष्ट्रीय संस्कृत दिवस के रूप में मनाया गया। प्रमोद कुमार झा (अहमदाबाद) की अध्यक्षता में आयोजित इस वर्चुअल आयोजन के दौरान एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
संस्कृत को राष्ट्र भाषा बनाने की मांग :
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने संस्कृत को भारत की राष्ट्रभाषा बनाने की मांग भी की। वहीं मैथिली शिक्षा मंच सम्बद्ध अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् के संयोजक प्रो. पी.के. झा प्रेम ने संस्कृत को राष्ट्र भाषा घोषित करने की मांग का पुरजोर समर्थन किया।
संस्कृत प्राचीन ज्ञान-परंपरा की मूल भाषा :
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संस्थापक मिथिला संस्कृत परिषद सह अवकाशप्राप्त प्रोफेसर ऑफ मेडिसिन डॉ. धनाकर ठाकुर, ने अपने संबोधन में कहा कि, महर्षि पाणिनि विश्व के महानतम व्याकरणाचार्य थे। जिनका जन्म वर्तमान पाकिस्तान के क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की विरासत प्राचीन ज्ञान-परंपरा की मूल भाषा है। यह दुःखद है कि, नई पीढ़ी और शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण यह अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए टकटकी लगाए बैठी है।
हमरा आश्चर्य लगैत अछि :
पूनम झा (आसनसोल) द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से काव्य गोष्ठी में कई कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर पी. के. झा ने मैथिली में हमरा आश्चर्य लगैत अछि शीर्षक अपनी रचना प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
कविता में गैस की किल्लत :
इस दौरान मुख्य वक्ता डॉ. धनाकर ठाकुर ने समसामयिक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर आधारित एक संस्कृत में कविता भी सुनाई, जिसमें इजराइल–ईरान संघर्ष के कारण एलपीजी गैस आपूर्ति में उत्पन्न बाधा का उल्लेख किया गया।
संचालन और धन्यवाद ज्ञापन :
कार्यक्रम का संचालन अक्षय झा ने किया। अंत में नरेन्द्र कुमार झा, संस्थापक पटना पुस्तक मेला, ने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।