
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर। हालिया संपन्न विधानसभा चुनाव कई संयोगों का साक्षी बना। एक तरफ तीन बार के विधायक राजद के कद्दावर नेता अख्तरूल इस्लाम शाहीन को करारी शिकस्त का सामना करना पडा, जबकि सरायरंजन विधानसभा से निर्वतमान मंत्री विजय चैधरी चैथी बार विधानसभा पहुंच गये।
कल्याणपुर विधायक सह निवर्तमान सूचना मंत्री महेश्वर हजारी और उजियारपुर विधायक राजद के कद्दावर नेता आलोक मेहता ने हैट्रिक लगाने में सफलता पायी और लगातार तीसरी बार विधानसभा पहुंच गये।
इन सब से बढ कर जदयू नेत्री अश्वमेध देवी के जीतने के साथ ही जिले में निर्वाचित सभी चार शीर्ष पदों पर नारी शक्ति का काबिज होना सबसे बडा संयोग है। जिसने नारी सशक्तिकरण की दिशा में समस्तीपुर जिले की भूमिका को मजबूती प्रदान की। इसके पहले सांसद शांभवी चैधरी, नगर निगम की महापौर अनीता राम और जिला परिषद अध्यक्ष पद पर खुश्बू कुमारी महिला सशक्तिकरण की गवाही दे रही थी।
इसी क्रम में एक और संयोग बना जिसमें समस्तीपुर जिला के एक ही विधानसभा क्षेत्र को चार-चार विधायकों की जननी होने का गौरव प्राप्त हुआ।, जिसमें तीन जदयू और एक भाजपा विधाायक शामिल हैं।
वह गौरवशाली विधानसभा है वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र।
जिसमें वारिसनगर विधानसभा से जदयू के टिकट पर विधानसभा पहुंचे पुर्व विधायक अशोक कुमार मुन्ना के पुत्र मांजरिक मूणाल, कल्याणपुर से लगातार तीसरी बार विधायक बने जदयू नेता महेश्वर हजारी, समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधानसभा पहुंची भूतपूर्व सांसद अश्वमेघ देवी और रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक बने भाजपा नेता बीरेंद्र पासवान का घर वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है।
इस प्रकार जिले के कुल दस विधानसभा क्षेत्र में से अकेले वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र से आने वाले 4 लोग विधायक बने हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो समस्तीपुर जिला के चालीस प्रतिशत सीटों पर वारिसनगर के विधायकों का दबदबा है।
हलांकि इससे वारिसनगर के दशा व दिशा में कोइ खास बदलाव के आसार नहीं हैं। क्योंकि विगत 2020 के चुनाव में भी वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र ने सदन को तीन विधायक दिए थे। चिराग तले अंधेरा वाली कहावत वारिसनगर पर बिलकुल सटीक बैठती है। हर विधान सभा में दो-तीन विधायक देने के बावजूद वारिसनगर विधासभा क्षेत्र आज भी विकास से कोसों दूर है। हर तरफ बदहाली अपने उद्धारक का रास्ता निहार रही है।