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Home » आसानी से नहीं होती साइबर फ्रॉड मामले में एफआईआर दर्ज

आसानी से नहीं होती साइबर फ्रॉड मामले में एफआईआर दर्ज

Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar02/03/2025Updated:02/03/2025No Comments3 Mins Read
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समस्तीपुर। डिजिटल इंडिया में ठगी के नये नये तरीके ईजाद हो गये हैं। जिन्हें साइबर फ्रॉड नाम दिया गया और इस पर अंकुश लगाने केलिए साइबर थाना बना दिया गया।किन्तु इस तरह के मामले में एफआईआर दर्ज कराने में पीड़ित को लोहे के चने चबाने पडते हैं। महीनों साइबर थाने का चक्कर लगाने के बाद भी पुलिस मामला दर्ज नहीं करती है।

यहां तक कि पीडित को प्राथमिकी दर्ज कराने केलिए मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करानी पडती है। वहां से निर्देश मिलने के बाद ही पुलिस एफआईआर दर्ज करती है।

ऐसे एक नहीं कई मामले हैं, जिसमें पुलिस ने महीनों बाद एफआईआर दर्ज किया है। साइबर थाने में डीएसपी रैंक के पदाधिकारी एसएचओ के प्रभार में है। फिर भी मामला दर्ज करने में ये हाल है तो कार्रवाई क्या होती होगी सहज कल्पनीय है। बताते चलें कि पिछले साल साइबर थाना में 73 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, इस वर्ष अब तक 13 मामले रजिस्टर्ड हुए हैं।

01) ठगी के तरीकों में,  संदिग्ध लिंक पर क्लिक कराकर बदमाश बैंकिंग डिटेल चुरा लेते हैं। वहीं बैंक केवाईसी और क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर फर्जीवाड़ा करते हैं।

02) नकली कस्टमर केयर बनकर झूठे इनाम या कैशबैक का लालच देकर ओटीपी पूछते हैं। फिर बैंक खाता खाली कर देते हैं।

03) साइबर बदमाश जॉब वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए नौकरी के ऑफर देते हैं। फिर आवेदन के बहाने डिटेल ले कर बैंक खाता खाली कर देते हैं।

04) ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर पैसों की मांग की जाती है। हाई रिटर्न का झांसे में आए लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं।

साइबर थाना के प्रभारी एसएचओ आशीष राज कहते हैं कि “दर्ज मामलों में कार्रवाई होती है। पीड़ितों का पैसा होल्ड और रिटर्न भी होता है। मुख्यालय स्तर से रेगुलर इसकी मॉनिटरिंग होती है।” मगर हकीकत कुछ और बयान करती है।

01) मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के आजादनगर निवासी रामाशीष महतो की पत्नी स्वीटी कुमारी को प्रयागराज में पढ़ाई करने वाले उनके पुत्र को पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए जाने का काॅल आया। उसे छुड़ाने केलिए उनसे 20 हजार रुपए की ठगी कर ली गई।

10 महीने साइबर थाना का चक्कर लगाने के बाद भी मामला दर्ज नही हुआ। मानवाधिकार आयोग से शिकायत करने के बाद पुलिस ने उनका मामला दर्ज किया। पीड़ित के अनुसार इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

02) पटोरी थाना क्षेत्र के हवासपुर के मो. आरिफ के पुत्र मो. नूर आलम को पिछले वर्ष 16 जनवरी को बैंक में आधार केवाईसी केलिए फोन आया था। उसके बाद 21 जनवरी 2024 को उनके बैंक खाते से 56 हजार रुपया गायब हो गया।

पुलिस ने 10 महीने बाद एफआईआर दर्ज किया। पीड़ित ने बताया कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

03)  हलई (ताजपुर) थाना के रड़ियाही कुमैया निवासी नरसिंह राय के पुत्र रामप्रवेश राय के साथ 13 नवंबर को आधार एक्टीवेट के बहाने दो लाख 50 हजार रुपए का साइबर फ्रॉड कर लिया।

लगभग 40 दिन साइबर थाने काचक्कर लगाने के बाद चार जनवरी को पुलिस ने उनका मामला दर्ज किया। पीड़ित  के अनुसार पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

 

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