
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क समस्तीपुर। तू खुदा है माना तेरा जोर है हर शै पर, तेरी संतान हैं हम भी, मेरी हार तेरी हार न होगी?
प्राकृतिक अक्षमता या कमी को नजर अंदाज कर आगे बढने की जिद, कुछ कर दिखाने का जज्बा और मुश्किलों से हालात से हार नहीं मानने की प्रचंड इच्छाशक्ति हो तोे कामयाबी कदम चूम ही लेती है। फिर मिसाल बनते देर नहीं लगती। फिर तो कोई मुश्किल आपके कदम नहीं थाम सकती, आप रूक नही सकते।
कुछ ऐसी ही कहानी है उजियारपुर प्रखंड के चैता गांव निवासी, दिव्यांग अर्जून दास की। जिन्होंने सिर्फ अपनी इच्छाशक्ति के बल पर अपने ग्राम्य क्षेत्र में एक नयी ईबारत लिख दी है। उजियारपुर प्रखंड के अंगारघाट थाना क्षेत्र के चैता गांव निवासी, दिव्यांग अर्जुन दास ने कभी अपने छोटे कद को अपनी प्रतिभा के आड़े नही आने दिया।
दिव्यांग अर्जुन दास आज भी अपने गाँव के सैकड़ों बच्चों को निःशुल्क ट्यूशन देकर, उनके अंदर ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। बताते चलें कि दिव्यांग अर्जुन दास की लंबाई मात्र 2 फीट है। इसके बाबजुद वह अपने समाज के सभी बच्चों को शिक्षित बनाने का जिम्मा लिए हुए हैं।
इसकी सुचना मिलते ही चर्चित युवा समाजसेवी भाई राजू साहनी छोटे कद के इस बडे शिक्षक दिव्यांग अर्जुन दास से मिलने उनके आवास सह शिक्षण संस्थान पर पहुंच गए। जहां युवा समाजसेवी भाई राजू साहनी दिव्यांग शिक्षक अर्जुन दास को सम्मानित किया, उनके जज्बे को सलाम किया तथा उनके द्वारा समाज में शिक्षा की अलख जगाने पर उन्हें धन्यवाद दिया।
इस दौरान समाजसेवी भाई राजू साहनी ने, उनके यहां ट्यूशन लेने वाले दर्जनों छोटे छोटे बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री का उपहार दिया। इस अवसर पर श्री साहनी ने कहा कि, आम तौर पर गांव-देहात में बच्चे के दिव्यांग होने पर उनके माता पिता अपना सिर पकड़कर बैठ जाते हैं, कुछ अपने जीवन को निराशा से भर लेते हैं, कुछ गलत निर्णय लेने की सोचने लगते हैं। उन सभी के लिए भाई अर्जून आज प्रेरणाश्रोत बनकर सामने आए हैं।
इन्होंने आज दुनियां को बता दिया कि, दिव्यांग होना कोई अभिशाप नही है। आज अर्जुन दास जी दिव्यांग होने के बावजूद ग्रेजुएशन तक की शिक्षा पुरी करने के बाद आज अपने गांव के बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। आने वाले दिनों में मै भी इनकी हरसंभव मदद करूंगा।
वहीं छोटे कद के शिक्षक श्री दास ने बताया कि, वह काफी गरीब परिवार से संबंध रखते हैं। जिस समय वह विद्यालय जाना शुरू किए थे तो, उस समय कुछ लोगों ने उनका मजाक भी बनाना शुरू किया था। बाबजूद उन्होंने हिम्मत नही हारी। ग्रेजुएशन पुरी करने के बाद वह घर पर ही रहने लगे, तथा आसपास के बच्चों को मुफ्त ट्यूशन देने लगे।
धीरे-धीरे उनके यहां पढ़ाई करने वाले बच्चों की भीड़ बढ़ने लगी। जिसके कारण कभी कभी दो शिफ्ट में बच्चों को पढ़ाना पड़ता था। कभी शुल्क लेने की सोचा नहीं। विगत कुछ दिनों से बच्चे कुछ देने लगे हैं तो भी जिसने जो दे दिया वही रख लिया।
मौके पर सरपंच प्रतिनिधि जयराम साहनी, चंद्रकांन्त सिंह सुखलाल सहनी, रत्नेश राय श्रीराम साहनी, प्रमोद राय सुजीत कुमार, वरूण राय, सियाराम राम राय सहित दर्जनों की संख्या में स्थानीय लोग व दर्जनों बच्चे मौजूद रहे।