स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की अध्यक्षता में फैटी लिवर एवं गैर-संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

ओई नी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पटना। फैटी लिवर मोटापा सहित कई बीमारियों की जननी है। इसकी समय रहते पहचान और रोकथाम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से होने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सोमवार को आयोजित स्वास्थ्य विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि, इसके लिए लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। बैठक के दौरान श्री निशांत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस अभियान को पूरी गंभीरता और प्राथमिकता के साथ लागू किया जाए।
‘स्वस्थ लिवर–स्वस्थ बिहार’ कार्यक्रम को लागू करने पर चर्चा :
बताते चलें कि, स्वास्थ्य विभाग के सभागार में सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार एवं स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बिहार में फैटी लिवर की बढ़ती समस्या और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए तैयार किए गए ‘स्वस्थ लिवर–स्वस्थ बिहार’ कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
फैटी लिवर की जांच एवं रोकथाम के लिए आईएलबीएस के सहयोग से विशेष अभियान :
बैठक में निर्णय लिया गया कि यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज – आईएलबीएस), नई दिल्ली के तकनीकी सहयोग से राज्य के सभी 38 जिलों में फैटी लिवर की जांच एवं रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। बैठक के दौरान इस संबंध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े संस्थान के निदेशक सह चांसलर डॉ. एस.के. सरीन के साथ विस्तृत चर्चा की गई।
18 महीनों में 26 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच करने का लक्ष्य :
अभियान के तहत आगामी 18 महीनों में राज्य के 30 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 26 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य फैटी लिवर की समय पर पहचान, रोकथाम तथा जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है।
घर–घर जा कर प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था :
इस कार्यक्रम को राज्य में पहले से संचालित गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जोड़कर लागू किया जाएगा, ताकि लोगों को उनके घर के नजदीक ही जांच और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और जीविका दीदियों की सहायता ली जाएगी। इनके माध्यम से घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने के साथ ही प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की जाएगी।
दिया जाएगा स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण :
अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके तहत 150 मास्टर ट्रेनरों सहित लगभग 25 हजार स्वास्थ्यकर्मियों, डॉक्टरों, नर्सों और लैब तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने की योजना है। इससे जमीनी स्तर पर फैटी लिवर की समय पर पहचान, जांच और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा की व्यवस्था :
कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा की व्यवस्था की जाएगी। जिला स्तर पर जिलाधिकारी, प्रमंडल स्तर पर प्रमंडलीय आयुक्त और राज्य स्तर पर स्वास्थ्य मंत्री द्वारा कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, ताकि निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा किया जा सके।
उपस्थिति :
इस अवसर पर राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री के आप्त सचिव कौशलेंद्र कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।