
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। मिथिला कला केवल एक कला नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक विरासत के साथ–साथ विश्व स्तर पर बिहार और मिथिला की पहचान है। संभवतः त्रेता युग से आरम्भ यह कला पूर्व में विवाहादि मांगलिक अवसरों में रंग भरती थी मगर आज, विश्व स्तर पर इस कला की पहचान बनने के बाद खास कर मिथिला पेंटिंग और इससे सजी वस्तुओं की मांग बढ़ी है, जिससे यह स्वरोजगार के विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभरा है।
पेंटिंग की विश्व स्तर पर अपेक्षाकृत अधिक मांग :
द उम्मीद द्वारा संचालित सोशल समर इंटर्नशिप के क्रम में आयोजित मिथिला पेंटिंग के विशेष प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए मिथिला पेंटिंग कलाकार सौम्या सुमन ने उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि, ‘मिथिला पेंटिंग’ मिथिला कला का ही एक अंग है, जिसकी विश्व स्तर पर अपेक्षाकृत अधिक मांग है।
लकीरों की बारीकी और प्राकृतिक रंग ही विशेषता :
इस दौरान सुश्री सौम्या ने बताया कि, ’मिथिला पेंटिंग’ बारीक लकीरों पर आधारित कचनी – भरनी और चुनिंदा रंगों के प्रयोग से प्रभाव उत्पन्न करने की कला है। लकीरों की बारीकी ही इसकी विशेषता है। बारीक लकीरें और प्राकृतिक रंगों की कारीगरी से उत्पन्न प्रभाव व रसानुभूति लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावना :
बताते चलें कि, द उम्मीद द्वारा संचालित सोशल समर इंटर्नशिप 2026 के 9वें दिन आर्ट्स एवं कल्चर डोमेन के अंतर्गत मिथिला पेंटिंग का विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया है। इस दौरान प्रशिक्षुओं को मिथिला पेंटिंग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान तथा रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
बारीकियों का लिया व्यावहारिक ज्ञान :
प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को मिथिला पेंटिंग की मूलभूत तकनीकों, पारंपरिक आकृतियों, प्राकृतिक रंगों के उपयोग, रेखांकन शैली तथा विभिन्न कलात्मक प्रतीकों के महत्व को समझाया गया। इसके साथ ही छात्रों ने स्वयं पेंटिंग बनाकर इस लोककला की बारीकियों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
समर इंटर्नशिप का उद्देश्य :
द उम्मीद के संस्थापक एवं अध्यक्ष अमरजीत कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति एवं विश्वविद्यालयों की इंटर्नशिप आधारित शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप विद्यार्थियों को केवल पुस्तक आधारित ज्ञान ही नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति, कौशल एवं व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से समर इंटर्नशिप के अंतर्गत विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण :
उन्होंने बताया कि समस्तीपुर जिले में द उम्मीद द्वारा संचालित यह इंटर्नशिप कार्यक्रम विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ कौशल विकास, व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता तथा रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अवसर पर द उम्मीद की टीम एवं इंटर्नशिप से जुड़े मेंटर्स उपस्थित रहे।