
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। हमारे घरों में रखी पुरानी पांडुलिपियां सिर्फ कागज नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और पहचान की अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
पांडुलिपियों का डिजिटलाइजेशन तेज :
जिला पदाधिकारी रोशन कुशवाहा ने मंगलवार को उक्त बातें कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि, इसी सोच को मूर्त रूप देते हुए जिले में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन का अभियान तेज गति से आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि, जिला पदाधिकारी श्री कुशवाहा के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान ने अब तक एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है।
संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि :
इस क्रम में दलसिंहसराय में चलाए गए विशेष सर्वेक्षण अभियान के दौरान वार्ड संख्या 12 निवासी जितेंद्र राउत ने अपने स्तर से ढूंढ कर 25 प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी प्रभात रंजन को सौंपा। जिसे बीईओ श्री रंजन के समन्वय से ज्ञान भारतम् पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड कर दिया गया। इसके अलावा दलसिंहसराय स्थित पांडव मंदिर सहित अन्य मंदिरों और मठों से भी 30 से अधिक पांडुलिपियां प्राप्त की गईं। इस प्रकार जिले में अब तक कुल 77 पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन का कार्य पूर्ण हो चुका है। जो संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
डीईओ सम्मानित :
इस उपलब्धि पर जिला पदाधिकारी ने सराहना करते हुए जितेंद्र राउत और बीईओ श्री रंजन को पाग, स्मृति चिन्ह, शॉल आदि से सम्मानित किया। कार्यक्रम में कला संस्कृति पदाधिकारी जूही कुमारी भी उपस्थित रहीं और पूरे अभियान के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई।
सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और जागरूक बनाने का प्रयास :
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों, मंदिरों और मठों में सुरक्षित रखे 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें सामने लाएं। ताकि इस विरासत को डिजिटल रूप में सहेजा जा सके। यह पहल न सिर्फ इतिहास को संरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि समस्तीपुर को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और जागरूक बनाने का प्रयास भी है।