
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
रत्न शंकर भारद्वाज।
Oini 24 विद्यापतिनगर। जिला प्रशासन एवं कला संस्कृति विभाग द्वारा विद्यापतिधाम मंदिर पर आयोजित तीन दिवसीय ‘13वां विद्यापति राजकीय महोत्सव’ एक बार फिर महाकवि विद्यापति की कर्म स्थली ओईनी का जिक्र किए बगैर समारोह पूर्वक सम्पन्न हो गया। साथ ही छोड़ गया वही पुरानी कसक और जन मानस में कुछ खट्टी मीठी यादें और साकार होती दिखीं नाम बड़े और दर्शन छोटे, ऊंची दुकान फीके पकवान आदि लोकोक्तियां।
राजकवि विद्यापति ठाकुर को ‘महाकवि’ बनाने वाली धरती, ओईनी का जिक्र नहीं :
खबर है कि पूरे समारोह में ओईनवार राजदरबार के राजकवि विद्यापति ठाकुर को महाकवि बनाने वाली धरती, उनकी कर्मभूमि, जहां उन्होंने न सिर्फ अपने 32 साल बिताए, कीर्ति लता, कीर्ति पताका, लिखनावाली, पदावली आदि कालजयी ग्रंथों की रचना की, ओईनी की किसी को न याद आई न किसी ने जिक्र ही किया
मैथिल कोकिल की जयंती पर हिंदी का बोलबाला :
श्रोताओं से कहीं अधिक घिसे पिटे व रातों रात कवि बने स्वनाम धन्य कवियों की उपस्थिति, मैथिल कोकिल की जयंती पर आयोजित समारोह में मैथिली के प्रतिष्ठित कवियों और गायकों की अनुपस्थिति, हिंदी का बोलबाला आदि की चर्चा चौक–चौराहे, नुक्कड़ के चाय–पान की दुकानों पर चटकारे ले कर किए जा रहे हैं।
बच्चों ने रखी लाज :
लोग कहते दिख रहे हैं कि, वो तो हर बार की तरह इस बार भी बच्चों ने मैथिली गीतों की प्रस्तुति दे कर मैथिल कोकिल के मंच की लाज रख ली। वरना राजकीय प्रशस्ति पत्र हथियाने की होड़ में मैथिली तो हाशिए पर पड़ी रह जाती।
नहीं आए कई माननीय :
तीन दिवसीय कार्यक्रम में पहले दिन महोत्सव का उद्धाटन एवं संबोधन में मंत्री, विधान पार्षद, विधायक के आने से महोत्सव खुशनुमा एवं उत्साह पूर्ण तो रहा मगर, कई मंत्रियों, सांसदों, व विधायकों के आने की खबर के बावजूद उनके नहीं आने से लोगों में निराशा भी दिखी।
कलाकारों की लेट–लतीफी ने मजा किया फीका :
साथ ही संध्या में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में चर्चित एवं ख्याति प्राप्त कलाकार स्वाति मिश्रा एवं सत्येंद्र कुमार के काफ़ी विलंब से मंच पर आने से अधिकांश श्रोता दर्शकों को मायूसी हुई। काफ़ी ठंढ के कारण उन्हें बिना सुने ही वापस जाना पड़ा।
दूसरे दिन भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में गायिका शुभोश्री बनर्जी एवं गायक कपिल थापा के भी विलंब से मंच पर आने से अधिकांश लोगो को मायूस होकर ठंढ के कारण वापस घर जाना पड़ा।
श्रोताओं से कहीं अधिक कवि :
दूसरे दिन आयोजित कवि सम्मेलन में किसी नए और ख्याति प्राप्त कवि के नहीं आने से श्रोताओं में उत्साह कम दिखा फ़लतः दर्शक दीर्घा से कई गुना अधिक भीड़ मंच पर रही।
लेट लतीफी पर प्रशासन का दोहरा रवैया :
वहीं लेट से आने का हवाला देकर दरभंगा से पधारे मैथिली कलाकार को मंच पर जगह नहीं दिया जाना लोगो में चर्चा का विषय बना। कलाकारों को समय और मंच नहीं दिए जाने को लेकर, जिला कला संस्कृति पदाधिकारी जूही कुमारी और एसडीओ किशन कुमार ने बताया कि सरकारी प्रोग्राम में समय निर्धारित रहता है। दरभंगा से कलाकार काफ़ी विलंब से आए थे जिस कारण उन्हें मंच पर जगह नहीं मिला।
लोगों ने प्रशासनिक दलील किया खारिज :
जबकि लोगो ने पदाधिकारी द्वय की दलील को खारिज करते हुए कहा कि, कलाकार तो दोनों दिन लेट से ही आए थे, फिर उन्हें मंच कैसे मिला। समय की बाध्यता मैथिली कलाकारों के लिए ही क्यों?
स्थानीय लोगों बिगाड़ी व्यवस्था :
कलाकारों एवं अतिथियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था में लगे पुलिस बलों के लिए भोजन में कुछ स्थानीय लोगों का परिवार सहित तो कुछ का अकेले भोजन करना भी चर्चा में शामिल है। खबर है कि, बाद में भोजन कम पड़ गया था जिससे कुछ लोग टुकुर टुकुर ताकते रह गए।।