
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। “सरकार का लक्ष्य ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को पूरा करना है। जो गांवों के विकास के बिना कतई मुमकिन नहीं है और गांवों के विकास केलिए आवश्यक है कि ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण क्षेत्र में सभी के रोजगार के पर्याप्त अवसर सभी को सुलभ हो, सभी को काम मिले, सभी को आवास मिले, सभी को शिक्षा मिले तथा सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर ‘विबी जी राम जी’ नामक कानून बनाया गया है।”
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने सोमवार को समस्तीपुर परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार के विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण (विबी जी राम जी) योजना को लेकर विपक्ष के चिंताओं और आशंकाओं को खारिज करते हुए संवाददाताओं से उक्त बातें कही।
अपने बेबाकी के लिए प्रसिद्ध एवं भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे बढ़ाने वाले श्री ठाकुर ने कहा कि, “विपक्ष की, केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में धरना–प्रदर्शन आदि की, आलोचना और निंदा मेरा उद्देश्य कतई नहीं है। विपक्ष अपने दायित्व का निर्वहन कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि, “मनरेगा कानून 2005 में बना था। बेशक इस योजना के कारण तब से अब तक ग्रामीण परिदृश्य में व्यापक परिवर्तन हुआ, मगर, कई तकनीकी खामियों के कारण यह योजना इच्छित लाभ प्रदान करने में सफल नहीं हो पा रही थी। जिस कारण ‘मनरेगा योजना’ से ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षानुरूप बदलाव नहीं लाया जा सका।”
श्री ठाकुर के मुताबिक हालत ये हैं कि, भारत सरकार द्वारा लगभग 86 हजार करोड़ रुपए सालाना खर्च करने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में आशानुरूप विकास देखने को नहीं मिल रहा है। कई राज्यों में 60 से 80 वर्ष के लोगों को मजदूरी करते हुए दिखाया जा रहा है जिससे यह पता चलता है कि इस योजना में बड़े पैमाने पर लूट और भ्रष्टाचार व्याप्त है।
इसीलिए इस कानून में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और इसी को देखते हुए नया कानून बनाया गया है ताकि इसमें डिजिटल तकनीक का उपयोग कर पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
‘विबी जी राम जी’ की विशेषता और प्रासंगिकता :
श्री ठाकुर ने ‘विबी जी राम जी’ योजना की विशेषता और प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि, “इस नई योजना में काम के दिवस को 100 से बढ़कर 125 दिन किया गया है। सभी मजदूरों को काम मिलने की गारंटी का प्रावधान किया गया है।”
बुआई–कटाई के समय मजदूर की उपलब्धता :
राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि, वह बुआई तथा कटाई के समय अधिकतम 60 दिन का समय तय करें, जिसके दौरान इस कानून के तहत काम नहीं कराया जाएगा। ताकि बुआई–कटाई के समय किसानों केलिए श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
विकसित पंचायत’ हेतु आपेक्षित योजना आधारित :
पहले यह मांग आधारित थी, मगर अब इसे ‘विकसित ग्राम पंचायत’ के लिए अपेक्षित योजना आधारित बनाया गया है। राज्यों को कम विकसित ग्राम पंचायतों के विकास के लिए प्राथमिकता देने का अधिकार प्रदान किया गया है।
राज्यों की हिस्सेदारी से राज्यों की सहभागिता :
पहले यह केंद्र सरकार की योजना थी जिससे केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों की हिस्सेदारी का अनुपात 90:10 था। मगर अब इस नई योजना में राज्यों की सहभागिता केलिए उनके दर्जे के आधार पर हिस्सेदारी तय की गई है, जिसके मुताबिक, “इस योजना में पूर्वोत्तर के राज्यों तथा पहाड़ी राज्यों की हिस्सेदारी 90:10 के अनुपात में होगी, जबकि बाकी राज्यों में 60:40 के अनुपात में लागू की जाएगी।”
उन्होंने बताया कि, “ग्रामीण क्षेत्र में सभी को 125 दिनों का रोजगार प्रदान करने के लक्ष्य पर लगभग 1,51,281.05 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान है। जिसमें राज्य सरकारों की हिस्सेदारी नियमानुसार तय की जाएगी।”
मजदूरों को भी मिलेगा बेरोजगारी भत्ता :
साथ ही, इस योजना में समय पर काम न मिलने पर मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता का भी प्रावधान किया गया है। वर्तमान में बेरोजगारी भत्ता 100% राज्य सरकारों द्वारा शिक्षित युवा बेरोजगारों को ही दी जाती रही है। अब बेरोजगारी भत्ते को इस योजना में शामिल करते हुए ग्रामीण मजदूरों को भी इस भत्ते का पात्र बनाया गया है और बेरोजगारी भत्ते में केंद्र की हिस्सेदारी भी सुनिश्चित की गई है।