
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। अरावली कटी तो हम सब मिटेंगे। राजस्थान से गुजरात तक ही इससे उत्पन्न तबाही का असर नहीं दिखेगा, बिहार भी इस तबाही से अछूता नहीं रह सकेगा। इस केलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए भाकपा माले जिला सचिव कॉ प्रो उमेश कुमार ने कहा कि, “पीएम यह भूल गए हैं कि देश की जनता के साथ–साथ उसके हितों, संसाधनों और विरासत के रक्षा की जिम्मेदारी उनकी ही है।”
उन्होंने कहा कि, “अदालत सहित तमाम संवैधानिक संस्थाओं के अकेले अधिनायक पीएम की मर्जी के बिना इतना बड़ा फैसला लिया जाना कतई संभव नहीं।”
बताते चलें कि, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अरावली की नई परिभाषा को लेकर देश भर में रोष व्याप्त है। जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले पहाड़ों को अरावली नहीं मानने की बात कही गई है। इस नई परिभाषा को लेकर, देश व्यापी आंदोलन और मुबाहिसों का सिलसिला सा चल पड़ा है।
इस देश व्यापी रोष का असर समस्तीपुर में भी दिखा जब इस विवादित सुप्रीम फैसले के खिलाफ जिला कार्यालय मालगोदाम चौक से भाकपा (माले) ने देश व्यापी कार्यक्रम के तहत प्रतिरोध मार्च निकाला।
इस दौरान, प्रदर्शनकारी पहाड़ कटे तो हम सब मिटेंगे, प्राकृतिक और खनिज संपदा को क्षति पहुंचाना बंद करो, एक सौ मीटर की उंचाई से कम वाले पहाड़ की अरावली नहीं मानने के फैसले पर रोक लगाओ, सौ मीटर से कम ऊंचाई वाले पहाड़ को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने की साज़िश नहीं चलेगी, पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगाओ, जलवायु संरक्षण करना होगा आदि नारे लगा रहे थे।
नारे लगाते शहर के विभिन्न चौक चौराहे से गुजरते हुए माले नेता व कार्यकर्ताओं का जत्था स्टेशन चौक गांधी स्मारक के पास पहुंच कर प्रतिरोध सभा में तब्दील हो गया।
और क्या कहा?
प्रतिरोध सभा को सम्बोधित करते हुए माले जिला सचिव प्रो. कॉ उमेश कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर से 370 हटाने की आड़ में अडानी को अरबों का फायदा पहुंचाने के बाद अब अरावली की खनिज संपदा भी अडानी अंबानी के हवाले करने की पटकथा लिखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ सरकार की गलत नीति के कारण दर्जनों छोटे छोटे पहाड़ों और लाखों पेड़ो को कार्पोरेट रूपी हनुमान ने गायब कर दिए हैं। जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
अरावली कटी तो ?
कॉ उमेश ने बताया कि “पर्यावरण और प्रकृति के प्रति हमारी संवेदना पर भोग विलासी प्रवृति के भारी पड़ने के कारण उपजाऊ जमीनें ऊसर मरुभूमि में बदल रही हैं। मरुभूमि में जल संरक्षण मुश्किल हो रहा है। वायुमंडल प्रदूषित हो रहे हैं। इसी बीच अगर अरावली कटी तो हालात और विकराल रूप लेंगे जिसमें अरावली के साए में पल रहे राज्य मरुभूमि में बदल जाएंगे।
इतना ही नहीं!
उन्होंने यह भी कहा कि, “अरावली कटने से शेष इलाकों में प्रदूषण पर नियंत्रण नामुमकिन हो जाएगा। हिमालय पर ग्लेशियर अधिक पिघलने से बिहार सहित कई राज्यों के लिए बाढ़ स्थाई समस्या बन जाएगी, इसलिए अरावली को बचाना होगा।”
सभा को कॉ. ललन कुमार, कॉ. उपेन्द्र राय, कॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, अनिल चौधरी, राजकुमार चौधरी, जयंत कुमार, खुर्शीद खैर, लोकेश कुमार, सुनील कुमार, दीपक कुमार यदुवंशी, विवेक कुमार सिंह, धीरज कुमार, प्रशान्त कुमार, अनिल कुमार, अंशु कुमार, कुन्दन कुमार आदि ने संबोधित किया।