
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर । इधर हर गुजरते दिन के साथ ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है, उधर शहर के मालगोदाम चौक स्थित स्लम बस्ती के 300 से अधिक परिवारों को प्रशासन द्वारा मात्र 10 दिनों में बस्ती खाली करने का फरमान जारी कर दिया गया है।
सिर पर मंडराते बेघर होने के खतरे से इस बस्ती के लोगों में गहरी चिंता और असुरक्षा का माहौल है। आखिर इस ठंड में जाएं तो कहां जाएं ये किस्मत के मारे बेचारे।
इस बस्ती में अधिकांश कुष्ठ आदि गंभीर रोग से पीड़ितों के परिजन और भीख मांग कर जीवन यापन करने वाले लोग है। करीब 35 वर्षों से यहां बदहाली में सपने बुनते जिंदगी तलाश रहे ये परिवार अब अपने घरों और जीवन के अस्तित्व को लेकर बेचैन हैं।
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और NCC के पूर्ववर्ती कैडेट्स द्वारा संचालित सामाजिक संस्था द उम्मीद ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी, रेलवे DRM, सांसद, विधान परिषद सदस्य, अनुमंडल पदाधिकारी, मेयर एवं नगर आयुक्त से वैकल्पिक सुरक्षित आवास और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग की है।
द उम्मीद के संस्थापक अमरजीत कुमार ने बताया कि इन परिवारों को वर्ष 2001 में तत्कालीन समस्तीपुर जिलाधिकारी के आदेश पर यहाँ बसाया गया था। इससे पहले ये सभी परिवार रेलवे स्टेशन परिसर में रहते थे।
उन्होंने कहा कि, ये लोग तो खुद यह जगह खाली करने को तैयार थे, वर्ष 2012 में भी इन लोगों ने जिला प्रशासन से वैकल्पिक आवास के लिए अपील की थी। परन्तु आज तक किसी प्रकार की स्थायी व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई।
विभिन्न पदाधिकारियों को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद किसी भी परिवार को बेघर न छोड़ा जाए। ये बेसहारा असहाय बच्चे, महिलाएँ और बुजुर्ग पिछले 35 वर्षों से यहाँ रह रहे हैं, जिन्हें एक जिलाधिकारी ने ही रेल परिसर से निकाल कर यहां (माल गोदाम चौक के निकट) बसाया था।
इनके सिर से छत छीन लेना सिर्फ क़ानूनी कार्रवाई नहीं, मानवीय त्रासदी होगी। हम प्रशासन से आग्रह करते हैं कि सभी परिवारों को सुरक्षित वैकल्पिक आवास और सम्मानजनक पुनर्वास प्रदान किया जाए।
”द उम्मीद का कहना है कि यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, इंसानियत, सामाजिक न्याय और असहाय बच्चों के भविष्य का मुद्दा है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि वह हर प्रभावित परिवार की आवाज बनकर उनके साथ खड़ी है।