
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। पोषण युक्त खाद्य आज देश और दुनिया में बेहद महत्वपूर्ण है। पोषण युक्त खाद्य से लोगों को शरीर के लिए सभी आवश्यक न्यूट्रीशन, विटामिन, मिनरल्स आदि मिलते हैं जिससे वे कम बीमार पड़ते हैं। पोषण युक्त खाद्य पदार्थों से शरीर की रोग-रोधी क्षमता में वृद्धि होती है।
डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के कुलपति डाॅ पीएस पाण्डेय ने गुरुवार को विश्वविद्यालय के पंचतंत्र सभागार में आयोजित पोषक खाद्य एवं कटाई उपरांत गुणवत्ता वृद्धि” विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि सबसे अधिक पोषण ताजे फल और सब्जियों से प्राप्त होता है। मगर फल एवं सब्जियों का सेल्फ लाइफ काफी कम होता है। कुछ ही समय में वे खराब हो जाते हैं, या उनके पोषक तत्वों में कमी आ जाती है। ऐसे में इनके सेल्फ लाइफ एक्सटेंशन पर शोध और अनुसंधान बेहद जरूरी है।
बताते चलें कि गुरुवार को डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के पंचतंत्र सभागार में “पोषक खाद्य एवं कटाई उपरांत गुणवत्ता वृद्धि” विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। सर्वप्रथम कुलपति सहित तमाम आगत अतिथियों का पुष्प गुच्छ एवं पौधा से स्वागत, अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रसारण के साथ कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन किया गया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में विवि के कुलपति डॉ पांडेय ने कहा कि इस तीन दिवसीय कार्यशाला में पोषक खाद्य पदार्थ के सेल्फ लाइफ और गुणवत्ता में वृद्धि पर विस्तार से चर्चा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सेंसर बेस्ड तकनीक से ऐसे छोटे और सस्ते यंत्र भी विकसित किए जाने की जरूरत है जिससे कि पोषक खाद्य की गुणवत्ता को कहीं भी कभी भी मापा जा सके। इस तीन दिवसीय कार्यशाला से निश्चित ही ऐसे परिणाम उभर कर आयेंगे जिनसे किसानों का फायदा सुनिश्चित हो सकेगा।
अपने संबोधन में काॅलेज आफ बेसिक साइंस के डीन डॉ अमरेश चंन्द्रा ने कहा कि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में फंक्शनल फुड पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि फंक्शनल फुड से बीमारी नहीं होती है बल्कि शरीर में बीमारी से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होता है।
उन्होंने कहा कि कटाई के उपरांत समुचित भंडारण के अभाव में कृषि उत्पाद विशेष रूप से फल और सब्जियां लगभग बीस प्रतिशत तक नष्ट हो जाते हैं और जो बच भी जाते हैं उसके पोषक तत्व में भी कमी आ जाती है। ऐसे फसलो के सेल्फ लाइफ बढ़ाने और पोषक तत्व को बरकरार रखने व इंटरडिसिप्लिनरी चर्चा को ध्यान में रखकर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इस कार्यशाला में देश भर के छह विश्वविद्यालय सहित आइसीएआर के वैज्ञानिक और छात्र शामिल हो रहे हैं।
कम्युनिटी साइंस डीन डॉ उषा सिंह ने कहा कि पोषण युक्त खाद्य आने वाले समय की जरूरत है और इस पर अभी से कार्य करने की जरूरत है। वहीं कुलसचिव डॉ मृत्युंजय कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय में पोषक खाद्य को लेकर निरंतर अनुसंधान किये जा रहे हैं। इस कार्यशाला में विभिन्न विषयों के और विभिन्न संस्थानों के छात्रों और वैज्ञानिकों के साथ संवाद से उसमें और निखार आएगा।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ केएल भूटिया ने किया। मौके पर निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ मयंक राय, डॉ महेश कुमार, डॉ अंजनी कुमारी, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत कई प्राध्यापक, वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे