
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 विभूतिपुर। वन्यजीव एवं जैव विविधता किसी भी देश की प्राकृतिक धरोहर होते हैं। इनके संरक्षण के बिना पर्यावरणीय संतुलन या संरक्षण संभव नहीं है।
वन्यजीव संरक्षण एवं जैव विविधता संरक्षण :
दूर देहात संस्था द्वारा संचालित, राष्ट्रीय शिक्षा नीति आधारित इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत रविवार को वन्यजीव संरक्षण एवं जैव विविधता संरक्षण विषय पर आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए वन प्रमंडल क्षेत्र रोसड़ा के वन रक्षी विश्व बंधु ने उक्त बातें कही।
प्राकृतिक आवासों का संरक्षण :
इस दौरान उन्होंने इंटर्न विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। अपने संबोधन में श्री विश्वबंधु ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का उद्देश्य वन्य जीवों, पक्षियों, दुर्लभ वनस्पतियों तथा उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करना है।
चुनौतियों पर भी चर्चा :
साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, आरक्षित वन एवं संरक्षित क्षेत्रों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि, वन्यजीवों के अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी, वनों की कटाई तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।
आह्वान :
श्री विश्व बंधु जी ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने युवाओं से प्रकृति संरक्षण एवं जन-जागरूकता अभियानों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
उद्देश्य :
दूर देहात संस्था के संस्थापक प्रभु नारायण झा ने कहा कि संस्था का उद्देश्य युवाओं को केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक, पर्यावरणीय एवं राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति भी जागरूक बनाना है।
सफल आयोजन में भूमिका :
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्था के इंटर्नशिप सुपरवाइजर पिंटू कुमार, कार्यक्रम समन्वयक मनीष कुमार एवं अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।