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Home » जीविका जैसी योजनाओं ने किया महिलाओं को संगठित कर आत्मनिर्भर बनाने का ऐतिहासिक कार्य – प्रो. (डॉ.) शशि

जीविका जैसी योजनाओं ने किया महिलाओं को संगठित कर आत्मनिर्भर बनाने का ऐतिहासिक कार्य – प्रो. (डॉ.) शशि

Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar17/01/2026Updated:17/01/2026No Comments5 Mins Read
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उद्घाटन करते प्राचार्य व अन्य।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 समस्तीपुर। “भारत एक कृषि प्रधान देश है, जिसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है। इसलिए देश के विकास में ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना प्रदेश या राष्ट्र के समग्र विकास की कल्पना ही नहीं की जा सकती। ऐसे में सरकार की स्वयं सहायता समूह और जीविका जैसी योजनाओं ने महिलाओं को संगठित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का ऐतिहासिक और सराहनीय कार्य किया है।”

समस्तीपुर कॉलेज, समस्तीपुर के स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग के तत्त्वावधान में आयोजित बिहार में महिला सशक्तिकरण में जीविका की भूमिका विषयक व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार ‘शशि’ ने उक्त बातें कही।

आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त महिलाएं :

उन्होंने कहा कि, “स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को बचत की आदत, बैंक ऋण, स्वरोजगार के अवसर और विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। इसके परिणामस्वरूप महिलाएँ आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हुई हैं।

महिला सशक्तिकरण में जीविका की भूमिका विषयक व्याख्यान आयोजित : 

बताते चलें कि, महाविद्यालय के स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग के तत्त्वावधान में व्याख्यान माला के तहत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार ‘शशि` की अध्यक्षता में बिहार में महिला सशक्तिकरण में जीविका की भूमिका विषयक व्याख्यान का आयोजन किया गया।

सकारात्मक बदलाव की वाहक बनी महिलाएं :

परंपरानुसार, दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के साथ व्याख्यान का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानाचार्य ने कहा कि आज जीविका से जुड़ी महिलाएँ केवल घर-गृहस्थी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सफल उद्यमी, कुशल नेतृत्वकर्ता और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली शक्ति बन चुकी हैं।

सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका सराहनीय : 

जीविका ने महिलाओं में आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाया है। बाल विवाह, दहेज प्रथा, नशाबंदी, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक मुद्दों पर जीविका समूहों की सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका अत्यंत सराहनीय है।

बिहार के समग्र विकास की नींव :

अंत में उन्होंने कहा कि, “जीविका कार्यक्रम ने बिहार की महिलाओं को सम्मान, पहचान और आत्मनिर्भरता प्रदान की है। यह योजना केवल महिला सशक्तिकरण का माध्यम ही नहीं है, बल्कि बिहार के समग्र और सतत विकास की मजबूत नींव भी है।”

संसाधनों के सदुपयोग से समाज और राज्य का संतुलित विकास :

उन्होंने अर्थशास्त्र की व्याख्या करते हुए कहा कि, “बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में महिलाएँ, खेती, पशुपालन, कुटीर उद्योग और स्थानीय उत्पादन से सीधे जुड़ी हुई हैं। जीविका कार्यक्रम इन महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों का सक्रिय हिस्सा बनाता है। यही किसी समाज के विकासोन्मुख अर्थशास्त्र की वास्तविक भावना है, जिसमें संसाधनों का सदुपयोग कर समाज और राज्य का संतुलित विकास की कहानी लिखी जाती है।”

 रोजगार सृजन से गरीबी उन्मूलन की दिशा में एक सफल और प्रभावी मॉडल  :

इस अवसर पर अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि बिहार में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जीविका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे आज महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ–साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। कुल मिलाकर ‘जीविका’ महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ रोजगार सृजन से गरीबी उन्मूलन की दिशा में एक सफल और प्रभावी मॉडल है।

सामाजिक असमानता को समाप्त करने का एक सशक्त माध्यम :

इस दौरान अतिथि वक्ता डॉ. सिप्पल कुमारी, और सहायक प्राध्यापिका बी.आर.बी. कॉलेज, समस्तीपुर ने अपने संबोधन में कहा कि, “महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरीबी, लाचारी और सामाजिक असमानता को समाप्त करने का एक सशक्त माध्यम भी है।”

निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भागीदारी : 

“जीविका से जुड़ कर महिलाएँ घरेलू कार्यों से आगे बढ़ कर छोटे-छोटे व्यवसाय, कृषि आधारित कार्य, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प सहित विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों को अपनाकर समाज में सम्मान और पहचान प्राप्त कर रही हैं। इससे न सिर्फ महिलाओं के आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है बल्कि, वे परिवार के संपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए पारिवारिक एवं सामाजिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।”

आत्मनिर्भर और समावेशी विकास की ओर बिहार :

उन्होंने कहा कि, ”महिला सशक्तिकरण का प्रभाव केवल परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सकारात्मक असर पूरे समाज और राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। ‘जीविका योजना’ के कारण ग्रामीण स्तर पर छोटे-छोटे व्यापार, और रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। संक्षेप में कहें तो, ‘जीविका योजना’ महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर बिहार को आत्मनिर्भर और समावेशी विकास की ओर ले जा रही है।

कई व्याख्याता व छात्र–छात्रा मौजूद :

मंच संचालन डॉ. खुर्शीद अहमद खान एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजय कुमार मिश्रा ने किया। मौके पर डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. राजा साहु , डॉ. कुमुद कुमार ने भी विषय से जुड़े विचारों को अभिव्यक्त किया। मौके पर अंकित कुमार, निकिता कुमारी, रोजी कुमारी, हर्ष कुमार, शहाबुद्दीन, निशा कुमारी, अंजली कुमारी समेत कई छात्र-छात्रा उपस्थित थे।

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