
ओईनी न्यूज नेटवर्क
सुभाष चन्द्र कुमार
समस्तीपुर/पूसा। रंगीन मछलियों के इस प्रशिक्षण से सजावटी मछलियों के रोजगार से सीधे जुड़कर युवा अपने कैरियर को नई उंचाई दे सकते है। यह कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है। डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविधालय के मात्स्यिकी महाविद्यालय सभागार में संपन्न रंगीन मछली के उत्पादन, मत्स्यपालन, प्रसंस्करण व संवर्धन विषयक छह दिवसीय तीन प्रशिक्षण के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव ने उक्त बातें कही।
उन्होने कहा कि रंगीन मछलियों के पालन एवं प्रजनन में प्रबंधन महत्वपूर्ण है। जिससे मत्स्यपालक कम जगह एवं लगभग शुन्य लागत में बेहतर उत्पादन कर अधिकाधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मीठे पानी की सजावटी मछलियों के प्रजनन और पालन विषयक रोजगार परक प्रशिक्षण के प्रथम बैच के 25 युवा प्रशिक्षणार्थी सफलता पूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वरोजगार के लिए तैयार किये गये है।
कार्यक्रम में निदेशक बीडीआई वैज्ञानिक डॉ एसके जैन, एवं प्रशिक्षण संयोजक रोशन कुमार राम उपस्थित थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में महाविद्यालय के स्नातक के छात्रों ने भी प्रशिक्षणार्थियों को एक्वेरियम निर्माण कार्य में तकनीकी सहायता कर प्रशिक्षुओं को प्रोत्साहित किया।
इस दौरान प्रमाण पत्र के साथ ही सभी प्रशिक्षणार्थियों को एक एक एक्वेरियम भी उपहार स्वरूप दिया गया। डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड, हैदराबाद, तेलंगाना द्वारा प्रायोजित यह रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम कुलपति डॉ. सुविमलेन्दु पुन्यव्रत पाण्डेय के दिशा निर्देश में संचालित किया गया।
मौके पर समस्तीपुर जिले के 25 प्रशिक्षुओं के साथ महाविद्यालय के शिक्षक डॉ शिवेन्द्र कुमार, डॉ. राजीव कुमार 5 ब्रह्मचारी, डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डॉ. अनिरूद्ध कुमार, डॉ. सुजीत कुमार नायक अधिष्ठाता के निजी सहायक डॉ. राजेश कुमार, महाविद्यालय कर्मी संजय कुमार यादव, विनोद कुमार, साजन कुमार भारती आदि मौजूद थे।


