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ओईनी न्यूजा नेटवर्क समस्तीपुर । महादेव की कृपा पाने का सबसे खास महीना सावन होता है। पंचांग के अनुसार यह महीना भोलेनाथ को बेहद प्यारा है। सावन के इस महीने में महादेव का जलाभिषेक हो या फिर सोमवार का व्रत, इसको बेहद खास माना गया है। यही कारण है कि सावन के महीने में महादेव की कृपा पाने के लिए शिवालयों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
हमारी संस्कृति में पेड-पौधे, जीव-जन्तु, पशु-पक्षी, धरती-आकाश, सुर्य-चंद्रमा यहां तक कि बादलों की पूजा अर्चना करने की परंपरा पौराणिक काल से ही चली आ रही है। इसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है नागपंचमी। जिसमें नागवंश की पूजा की जाती है।
मिथिला में इस पर्व का बेहद अलग एवं खास महत्व है। मिथिला की हर नव ब्याहता बेटी के जीवन में विवाहोपरांत प्रथम नागपंचमी का विशेष महत्व होता है। उनकेलिए आज से शुरू हो जाता है नागवंश पूजन का 15 दिवसीय मधुश्रावणी पर्व।
ब्राह्मण, कर्ण कायस्थ, एवं स्वर्णकार परिवारों की नव विवाहित बेटियां 15 दिनों तक महादेव एवं विषहारा की पूजा पूरे विधि विधान के साथ करती है। महादेव की उपासना के इस पावन महीने में देवाधिदेव के साथ माता गौरी और नागवंश या विषहरी नागिन से पति के लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के साथ-साथ अपने पति को अकाल मृत्यू से रक्षा केलिए प्रार्थना करती हैं।
मधुश्रावणी को लेकर माना जाता है इसकी शुरुआत प्राचीन काल में नवविवाहित महिलाओं को उनके वैवाहिक जीवन में सहजता प्रदान करने के लिए की गई थी। इस अवसर पर प्रतिदिन सखी सहेलियों व परिजनों के साथ विविध गीतों के बीच दूल्हन की तरह सोलह श्र्ृंगार में सजी नवब्याहतायें मौसमी फूल और विविध पत्ते इकट्ठा करती हैं। उसी फूल पत्तों से वे प्रतिदिन भगवान शिव और उनकी पत्नी माता गौरी के साथ विषहारा की पूजा भी करती हैं।
इस पर्व की एक और सबसे बड़ी खास बात है कि इस पूजा में न किसी पंडित पुरोहित की जरूरत होती है न ही किसी मंत्र का विधान है। गांव समाज की बुजुर्ग महिला ही इसमें खास होती है। नवविवाहिता को वही कथा भी सुनाती हैं टेमी सहित सभी विधान पूरा करती है। इस पूजा के अंतिम दिन टेमी देने और नवविवाहित के द्वारा सुहागिन महिलाओं में सुहाग सामग्री वितरण के साथ यह सांस्कृतिक अनुष्ठान संपन्न होता है।
इस 15 दिवसीय अनुष्ठान में अंतिम दिन नव ब्याहता को ‘टेमी’ दिया जाता है। इसमें उस नवविवाहिता दीपक की जलती बत्ती से दागा जाता है। इसको लेकर मान्यता है कि महिला के घुटने पर जितना बड़ा घाव होगा, उसके पति की आयु उतनी ही लंबी होगी।
हालांकि, फैशन के इस दौर में अपनी संस्कृति, मान्यताओं और परंपराओं से दूर जा रही पीढी केलिए ये दकियानूसी और आउटडेटेड चीजे बन गई तो अब ‘शीतल टेमी’ का चलन चल पडा है, जहां यह अनुष्ठान बिना आग के किया जाता है।
अगर आग का इस्तेमाल भी किया जाता है, तो वे बस महिलाओं के घुटनों के पास एक तेल का दीपक लाते हैं और फिर उसे तुरंत हटा देते हैं।