
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। मैं मैं करता पतन की सीमा पर जा रहा है आदमी, बड़ा बन कर खुद अपनी नजर से गिर रहा है आदमी। कुसुम पाण्डेय स्मृति साहित्य संस्थान के संस्थापक शिवेंद्र पाण्डेय की मौजूदा दौर में आम मनोवृति पर प्रहार करती इन पंक्तियों ने खूब तालियां बटोरी। पूरा सदन देर शाम तक वाह-वाह! की हर्षित ध्वनि से गुंजायमान रहा।
अवसर था कुसुम पाण्डेय स्मृति साहित्य संस्थान के तत्वावधान में केन्द्रीय विद्यालय समस्तीपुर के निकट स्थित कुसुम सदन के प्रांगण में रविवार को आयोजित एक काव्य संध्या का। जिसमें दूर दूर से बड़ी संख्या में रचनाकार उपस्थित हुए।
नरेश कुमार विकल की अध्यक्षता मे आयोजित इस काव्य संध्या का संचालन सुप्रसिद्ध साहित्य सेवी रचनाकार राज कुमार चौधरी ने किया। इस दौरान पटना से पधारी सुप्रसिद्ध गजलकार आभा अनुरंजिता तथा प्रसिद्ध गीतकार डॉ राम पुनीत ठाकुर तरुण विशिष्ट अतिथि के रूप में विराजमान रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार पाण्डेय ने मई महीने में उत्पन्न हिन्दी साहित्य के आधार स्तम्भ मार्कण्डेय प्रवासी, डॉ केदारनाथ लाभ, डॉ डी आर ब्रह्मचारी, डॉ सुरेन्द्र प्रसाद, लक्ष्मण शाहाबादी, सुमित्रानंदन पंत, शरद जोशी, गुरु देव रवीन्द्रनाथ ठाकुर, कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर, जिंदा कृष्ण मूर्ति, के कृतित्व तथा व्यक्तित्व पर विशद् चर्चा करते हुए उनके प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि व भावांजलि अर्पित किया।
विविध भजनो, ग़ज़लों, हास्य व्यंग्य से सराबोर हिन्दी, भोजपुरी, व मैथिली रचनाओं से सजी काव्य संध्या का आगाज डॉ राम सूरत प्रियदर्शी के चित्ताकर्षक मां सरस्वती की वंदना से की गई।
तदुपरांत राज कुमार राय राजेश, रामाश्रय राय राकेश, राज कुमार चौधरी, काविश जमाली, प्रवीण कुमार चुन्नू, शिवेंद्र कुमार पाण्डेय, रामलखन यादव, शुभम कुमार, विष्णु कुमार केडिया, दीपक कुमार श्रीवास्तव, डॉ अशोक कुमार सिन्हा, नरेंद्र कुमार सिंह त्यागी, अरुण कुमार सिंह मालपुरी, डॉ राम पुनीत ठाकुर तरुण, रत्नेश कुमार, आभा अनुरंजिता, हरे राम यादव, संजीव कुमार बर्नवाल, कासिम सबा, रंजना लता, आचार्य परमानन्द प्रभाकर, रिंकू शर्मा, डॉ परमानन्द लाभ आदि ने अपनी रचनाओं से खूब तालियां बटोरी। शैलजा कनिष्ठा ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ काव्य संध्या के समापन की घोषणा की।