
ओईनी न्यूज नेटवर्क
समस्तीपुर । अगले पांच दिनों में वर्षा की संभावना को देखते हुए तैयार मक्के के फसल की कटनी, दौनी तथा दानो को सुखाने के कार्य में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। सब्जी आदि फसलो पर कीटनाशकों का छिड़काव मौसम साफ रहने पर ही करें। डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मौसम वैज्ञानिक सह ग्रामीण मौसम सेवा के नोडल पदाधिकारी डाॅ सत्तार ने मौसम पुर्वानुमान के मद्देनजर किसान भाईयों केलिए सलाह व सुझाव जारी करते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने मौसम को देखते हुए जारी अपने सुझाव में बताया है कि किसान भाई लम्बी अवधि वाले धान की किस्में जैसे राजश्री, राजेन्द्र मंसुरी, राजेन्द्र स्वेता, स्वर्णा, स्वर्णा सब-1 वी०पी०टी०-5204 एवं राजेंद्र कस्तूरी की नर्सरी 25 मई से लगा सकते हैं। उन्होंने कहा है कि,
नर्सरी के लिए खेत की तैयारी
स्वस्थ पौध के लिए नर्सरी में सड़ी हुई गोबर की खाद का व्यवहार करे। नर्सरी में क्यारी की चैराई 1.25-1.5 मीटर तथा लम्बाई सुविधानुसार रखें। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई हेतु 800-1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की नर्सरी तैयार करें। बीज की व्यवस्था प्रमाणित स्रोत से ही करें और बीज गिराने के पूर्व बीजोपचार अवश्य कर लें।
खरीफ मक्का की बुआई के लिए खेत की तैयारी:
खेत की जुताई में 10 से 15 टन गोबर की सड़ी खाद प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करे। बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 30 किलो नेत्रजन, 60 किलो स्फुर एवं 50 किलो पोटाश का व्यवहार करें। उत्तर विहार के लिए अनुशंसित मक्का की किस्में जैसे देवकी, शक्तिमान 1, शक्तिमान-2, शक्तिमान-5, राजेन्द्र संकर मक्का-3, गंगा-11 है। खरीफ मक्का की बुआई 25 मई से करें।
डाॅ सत्तार ने बताया कि अगात मूंग, उरद की तैयार फलियों की तुड़ाई कर ले। पिछात बोयी गयी मूंग एवं उरद की फसल में पीला मोजैक रोग की निगराणी करें। यह विषाणु द्वारा उत्पन्न होने वाला विनाषकारी रोग है जो सफेद मक्खी (एक रस चूसक कीट) के द्वारा फसल में प्रसारित होता है।
इसके शुरूवाती लक्षण पत्तियों पर पीले धब्बे के रूप दिखाई देता है, बाद में पत्तियों तथा फलियों पूर्ण रूप से पीली हो जाती है। इन पत्तियों पर उत्तक क्षय भी देखा जाता है। फलन काफी प्रभावित होता है। उपचार हेतु रोग ग्रसित पौधों को शुरू में ही उखाड़ कर नष्ट कर दें तथा इमिडाक्लोरोप्रिड 17.8 एस० एल०ध्0.3 मि०ली० प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव मौसम साफ रहने पर करें।
वर्तमान मौसम में लत्तर वाली सब्जियों जैसे नेनुआ, करेला, लौकी (कद्दू), और खीरा फसलों में फल मक्खी कीट की निगरानी करें। यह इन फसलों को क्षति पहुंचाने वाला प्रमुख कीट है। मादा कीट मुलायम फलों की त्वचा के अन्दर अंडे देती है। अंडे से पिल्लू निकलकर अन्दर ही अन्दर फलों के भीतरी भाग को खाता है। जिसके कारण पूरा फल सड़ कर नष्ट हो जाता है। इस कीट का प्रकोप शुरू होते ही 1 किलोग्गाम छोआ (गुड़), 2 लीटर मैलाथियान 50 ई०सी० को 1000 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से 15 दिनों के अन्तराल पर दो बार छिड़काव मौसम साफ रहने पर करें।
गन्ना लगाने वाले किसानो के लिए सुझाव है कि अभी गन्ना फसल में कालिका रोग के प्रकोप की सभांवना है। इस रोग से आक्रांत पौधों के फुनगी से चबुकनुमा काला बंदल निकलता जो एक सफेद झिल्ली से ढका रहता है, जिसमे अनगिनत बीजाणु पाए जाते है। ऐसे रोगग्रस्त पौधों को पालीथीन बैग से ढककर सूड़ के साथ निकलकर नष्ट कर दे ताकि बीजाणु यत्र तंत्र न फैल सके। रोग ग्रस्त सूड़ को सावधानी पूर्वक निकालकर कार्बेन्डाजिम नामक फफूंदनाशी दवा का 0.1 प्रतिशत प्रति लीटर पानी से ट्रेंचिंग करे एवं प्रोपिकोनाजोल नामक दवा 0.1 प्रतिशत प्रति लीटर पानी से घोल बनाकर 15 दिनों के अंतराल पर तीन बार छिड़काव मौसम साफ रहने पर करे। रोग ग्रस्त खेतों में अगले तीन सालों तक गन्ने की रोपाई ना करें एवं गहरी जुताई कर फसल चक्र अपनायें।
जून महीने में बुआई हेतु बरसाती प्याज के लिए बीजस्थली की तैयारी करें। हरा चारा के लिए मक्का, ज्वार, बाजरा तथा लोबिया की बुआई करें। हरी खाद के लिए सनई और ट्रैचा की बुआई करें।