
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। “सतत कृषि विकास का लक्ष्य तब तक हासिल नहीं किया जा सकता, जब तक कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिला केंद्रित रणनीति तैयार कर महिलाओं की भूमिका को विकास की मुख्यधारा में शामिल कर उन्हें सशक्त न बनाया जाए।”
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को पुनर्परिभाषित करना : सतत कृषि विकास के लिए रणनीति विस्तार” विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय ने उक्त बातें कही।
कैंपस से लेकर खेत तक महिलाओं की भागीदारी :
अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि, “डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय महिलाओं को कृषि शिक्षा और अनुसंधान में आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम कैंपस से लेकर खेत तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ा रहे हैं।” इसी क्रम में उन्होंने कृषि के क्षेत्र में महिलाओं की सक्रियता को आकार देने केलिए किसान मित्र की तर्ज पर किसान सखी, पशु सखी जैसे पद सृजित करने की वकालत की।
पोषण सखी : नारी सशक्तिकरण में मील का पत्थर :
उन्होंने कहा कि, ग्रामीण क्षेत्र में 75 प्रतिशत कृषि की बागडोर महिलाओं के हाथ में है। वहीं पोषण के मामले में महिलाओं की भागीदारी 80 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए पोषण सखी के रूप में महिलाओं की क्षमता और कुशलता का उपयोग किया जा सकता है। यह नारी सशक्तिकरण कि दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

कृषि क्षेत्र में नारी सशक्तिकरण व लैंगिक समानता :
बताते चलें कि, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन (INSEE) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को विद्यापति सभागार में “कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को पुनर्परिभाषित करना: सतत कृषि विकास के लिए रणनीति विस्तार” विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। जिसमें देश भर से पधारे प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति निर्माता और प्रगतिशील किसानो ने कृषि क्षेत्र में लैंगिक समानता व महिला सशक्तिकरण पर मंथन किया।
उद्घाटन व अभिनंदन :
इस अवसर पर सर्वप्रथम कुलपति डॉ. पाण्डेय के नेतृत्व में आगत अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन किया गया। तत्पश्चात वन्दे मातरम् एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रसारण के साथ उद्घाटन सत्र की शुरुआत हुई। परंपरानुसार अतिथियों का शॉल, पुष्प गुच्छ, मोमेंटो, एवं उपहार आदि से अभिनन्दन किया गया।
स्वागत संबोधन :
तत्पश्चात आयोजन सचिव स्कूल ऑफ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. राम दत्त ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि, कृषि में महिलाओं का योगदान अब तक अदृश्य रहा है। इसे स्वीकार करना और मान्यता देना समय की मांग है।
याद किये गए पद्मश्री डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी :
कार्यक्रम के दौरान इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन के महासचिव कैप्टन डॉ. एल.बी. कलंत्री के नेतृत्व में कृषि के विकास में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी के योगदान को याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उनके जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण भी किया गया।
वृत्त चित्र का प्रसारण :
मुख्य अतिथि जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो. (डॉ.) परमेंद्र कुमार वाजपेयी ने कहा कि, “भारत में कृषि उद्योग या व्यवसाय नहीं बल्कि देश की आत्मा है, ग्रामीणों की संस्कृति है, साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसे ग्रामीण महिलाएं सदियों से अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। अब समय आ गया है कि हम महिलाओं की इस मूक भूमिका को पुनर्परिभाषित करें और उन्हें खेतों की परिधि से निकालकर नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाएं।”
महिला केंद्रित बदलाव की आवश्यकता :
इस दौरान अपने संबोधन में भारत सरकार के योजना आयोग के पूर्व कृषि सलाहकार सह इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन के उपाध्यक्ष डॉ. वी. वी. सदामते ने जोर दिया कि नीतियों में महिला केंद्रित बदलाव जरूरी हैं। उन्होंने कहा, कि ऋण, तकनीक और बाजार जब तक महिलाओं तक सीधे नहीं पहुंचेगी, सतत कृषि विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा। इसलिए विस्तार तंत्र को महिलाओं की भाषा और जरूरत के हिसाब से ढालना होगा।
महिला एसएचजी को तकनीकी मंच से जोड़ने की जरूरत :
अपने संबोधन में यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस बैंगलोर के पूर्व कुलपति सह इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन के अध्यक्ष डॉ. के. नारायण गौड़ा ने कहा, कि कृषि विज्ञान का लाभ महिला किसानों तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। हमें महिला प्रसार कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ानी होगी और महिला स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी मंच से जोड़ना होगा।”
महिला किसान को मिले बराबर का हक :
इस दौरान अपने विशेष संबोधन में ‘किसान चाची’ के नाम से मशहूर पद्मश्री राजकुमारी देवी ने कहा कि, गांव की महिलाएं सुबह से रात तक खेत में काम करती हैं, लेकिन पहचान पुरुषों को मिलती है। आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जब महिलाएं जुड़ती हैं तो पूरा परिवार और समाज बदलता है। इसलिए महिला किसान को बीज से बाजार तक की कड़ी में बराबर का हक मिलना चाहिए।”

कृषि क्षेत्र में योगदान को सम्मान :
इस अवसर पर अतिथियों ने सम्मेलन की स्मारिका और शोध सार का विमोचन किया। तत्पश्चात कृषि विस्तार में उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेषज्ञों को इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन अवार्ड्स’ से सम्मानित किया गया। जिसमें विधान चन्द्र कृषि विश्वविद्यालय डॉ. मानस अधिकारी, प्रेसिडेंट पी आरआईडीएस डॉ. वैंकू रेड्डी, एवं डॉ. योगेन्द्र कुमार कार्की को लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। इसी क्रम में पूसा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पी.एस. पांडेय को उनके कृषि शिक्षा अभिनव एवं नवाचारी प्रयोगों के लिए “मैन ऑफ एक्सीलेंस” अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा डॉ सुधांशु कुमार सहित करीब आधे दर्जन वैज्ञानिकों को विभिन्न अवार्ड से सम्मानित किया गया।
धन्यवाद ज्ञापन :
कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन की संयोजिका डीन कॉलेज ऑफ कम्यूनिटी साइंस डॉ. ऊषा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। तीन दिनों तक तकनीकी सत्रों में महिला उद्यमिता, जलवायु अनुकूल खेती और डिजिटल प्रसार जैसे विषयों पर विशेषज्ञ अपने शोध प्रस्तुत करेंगे।