
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। तेज रफ्तार से चल रही ट्रेन पर फेंका गया पत्थर अत्यधिक वेग से टकराता है, जिससे यात्रियों को गंभीर चोट लग सकती है, उनकी आंखों की रोशनी तक जा सकती है और कई मामलों में जान का भी खतरा उत्पन्न हो जाता है। यदि पत्थर ट्रेन से टकराकर वापस उछलता है, तो पत्थर फेंकने वाला व्यक्ति या उसके आसपास मौजूद लोग भी घायल हो सकते हैं। इसलिए चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकना केवल शरारत नहीं बेहद खतरनाक, और एक गंभीर दंडनीय अपराध है।
जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान :
शहर के भोला टॉकीज फाटक पर लोगों को जागरूक करते हुए आरपीएफ कर्मियों ने उक्त बातें कही। इस क्रम में उन्होंने बताया कि, रेलवे अधिनियम, 1989 की संबंधित धाराओं और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, यात्रियों की जान जोखिम में डालने और ट्रेन संचालन में बाधा उत्पन्न करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती है, जिसमें जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है।
विशेष जागरूकता अभियान :
बताते चलें कि, रेल मंडल में यात्रियों की सुरक्षा और रेल संपत्ति की रक्षा को लेकर रेल सुरक्षा बल की ओर से विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी जैसी खतरनाक घटनाओं को रोकना व लोगों को इसके गंभीर परिणामों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना था।
पत्थरबाजों की पहचान आसान :
यह अभियान आरपीएफ इंस्पेक्टर अविनाश कोरसिया के नेतृत्व में चलाया गया। जिसमें पी. के. चौधरी और श्याम सुंदर सिंह सहित रेल सुरक्षा कर्मियों ने भाग लिया। अभियान के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में अधिकांश ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे और निगरानी प्रणाली लगी हुई है। ऐसे में पत्थरबाजी करने वाले लोगों की पहचान आसानी से कर ली जाती है।
सलाह और अपील :
इसके साथ ही लोगों को चलती ट्रेन के दरवाजे पर बैठकर या खड़े होकर यात्रा नहीं करने, किसी भी अनजान व्यक्ति से खाने-पीने की वस्तु स्वीकार नहीं करने और रेलवे फाटक बंद होने पर उसे पार करने का प्रयास नहीं करने की सलाह दी गई। रेल सुरक्षा बल ने सभी नागरिकों से सुरक्षित रेल यात्रा सुनिश्चित करने के लिए नियमों का पालन करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत RPF या रेलवे हेल्पलाइन को देने की अपील की।