
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 कल्याणपुर। भारतीय ज्ञान परंपरा अतीत की स्मृति मात्र नहीं, बल्कि वर्तमान शिक्षा को मानवीय, मूल्यपरक, सृजनशील और भविष्योपयोगी बनाने की संभावनाओं से समृद्ध विरासत है।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी भारतीय ज्ञान, भाषाओं, कला, संस्कृति और परंपराओं को शिक्षा से जोड़ने तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक समग्र एवं संदर्भपरक बनाने पर बल देती है।
विशिष्ट अतिथि व्याख्यान का आयोजन :
इस संदेश के साथ प्रखंड के वीरसिंह पुर स्थित स्वायत्त एवं नैक बी++ मान्यता प्राप्त संस्थान संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज शुक्रवार को “शिक्षक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का एकीकरण: वर्तमान स्थिति और नवोन्मेषी संभावनाएँ” विषय पर विशिष्ट अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया।
उद्देश्य :
भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रकोष्ठ के तत्वावधान में तथा आर.ए.सी. के सहयोग से संपन्न इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को आधुनिक शिक्षक-शिक्षा से जोड़ कर भावी शिक्षकों के समक्ष इसकी प्रासंगिकता, वर्तमान स्थिति और नवाचार की संभावनाओं पर सार्थक विमर्श प्रस्तुत करना था। इसमें भारतीय दर्शन, संस्कृति, भाषा, साहित्य, ज्ञान-विज्ञान और जीवन-मूल्यों को समकालीन शैक्षिक संदर्भों में समझने पर विशेष बल दिया गया।
नवाचारी शिक्षण-पद्धतियों की संभावनाओं पर विशेष विमर्श :
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति एवं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) रजनीश कुमार शुक्ल ने प्रशिक्षुओं को संबोधित किया। उनके व्याख्यान में भारतीय ज्ञान परंपरा की शैक्षिक उपयोगिता, समकालीन शिक्षक-शिक्षा में उसके समावेशन तथा नवाचारी शिक्षण-पद्धतियों की संभावनाओं पर विशेष विमर्श हुआ।
स्वागत अभिनंदन :
इस अवसर पर सबसे पहले मैथिल परंपरा के अनुसार अतिथि का पाग, चादर आदि से स्वागत अभिनंदन के पश्चात दीप प्रज्वलन एवं संगीत के सहायक प्रोफेसर रोहित कुमार व प्रशिक्षुओं के गणेश वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद बी.एड. प्रशिक्षुओं द्वारा स्वागत गीत के बाद डॉ. अर्पणा कुमारी ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया।
भारतीय ज्ञान परंपरा और दर्शन की विवेचना :
विषय की रूपरेखा डॉ. अमित कुमार पाण्डेय ने प्रस्तुत किया तथा प्रशिक्षु प्रेरणा कुमारी एवं दर्पण कुमारी भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित प्रस्तुति दी। इसके पश्चात प्रो. शुक्ल का व्याख्यान हुआ, जिसमें प्रशिक्षुओं को प्रश्न पूछने और विषय पर संवाद करने का अवसर भी मिला। इस दौरान डॉ शुक्ल ने भारतीय ज्ञान परंपरा और दर्शन की विभिन्न दृष्टिकोण से विवेचना की।
समग्र व्यक्तित्व विकास की अवधारणाओं को समाहित करना आवश्यक :
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रोली द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि, यह भावी शिक्षकों को भारतीय ज्ञान-विरासत की गहराई से परिचित कराने और उसे समकालीन शैक्षिक आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल है। भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित नैतिक मूल्यों, तार्किक चिंतन, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, जीवन-दृष्टि और समग्र व्यक्तित्व विकास की अवधारणाओं को शिक्षक-शिक्षा में समाहित करना समय की आवश्यकता है।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन :
कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वेता द्विवेदी तथा धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्या डॉ. रोली द्विवेदी द्वारा किया गया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। मौके पर कॉलेज के सभी प्रशिक्षु व प्राध्यापक मौजूद थे।