Close Menu
  • होम |
  • देश/विदेश |
  • राज्य |
  • बिहार |
  • समस्तीपुर |
  • बिजनेस |
  • कृषि |
  • शिक्षा |
  • धर्म |
  • उपलब्धि |
  • सामाजिक |
  • विविध |
  • स्वास्थ्य
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • इंटरनेट का लाभ उठाने के लिए समझदारी और सावधानी जरूरी : डॉ. शशि
  • एचआईवी प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव समाप्त करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी : निशांत कुमार,
  • राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता के तैयारियों की जिलाधिकारी ने की समीक्षा, प्रतियोगिता 1 से 6 नवंबर तक
  • मिलावटी एवं एक्सपायर खाद्य सामग्री के विरुद्ध खाद्य विभाग की सख्ती जारी, कई प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस
  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में 3 दिसंबर से सजेगा किसान मेला, तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा विश्वविद्यालय
  • दरभंगा स्नातक/शिक्षक निर्वाचन 2026 : बूथ नंबर 60 पर 20 मतों का अंतर, हुई वोटों की हेराफेरी या मानवीय त्रुटि, जिम्मेदार कौन?
  • पर्व त्योहार के अवसर पर सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना हमारी शीर्ष प्राथमिकता : निशांत
  • खाद्य सुरक्षा को लेकर विभाग सख्त : पटना में 5 बेकरी प्रतिष्ठानों पर खाद्य सुरक्षा विभाग न की कार्रवाई, एक्सपायरी सामग्री नष्ट
Facebook X (Twitter) Instagram
Login
OINI24
  • होम |
  • देश/विदेश |
  • राज्य |
  • बिहार |
  • समस्तीपुर |
  • बिजनेस |
  • कृषि |
  • शिक्षा |
  • धर्म |
  • उपलब्धि |
  • सामाजिक |
  • विविध |
  • स्वास्थ्य
Facebook X (Twitter) Instagram
Login
OINI24
  • होम |
  • देश/विदेश |
  • राज्य |
  • बिहार |
  • समस्तीपुर |
  • बिजनेस |
  • कृषि |
  • शिक्षा |
  • धर्म |
  • उपलब्धि |
  • सामाजिक |
  • विविध |
  • स्वास्थ्य
Home » कृषि में डिजिटल तकनीकों को अपनाना विकल्प नहीं, आवश्यकता : कुलपति

कृषि में डिजिटल तकनीकों को अपनाना विकल्प नहीं, आवश्यकता : कुलपति

21वीं अनुसंधान परिषद खरीफ की तीन दिवसीय बैठक शुरू, कुलपति ने किया उद्घाटन
Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar06/07/2026Updated:06/07/2026No Comments4 Mins Read
Facebook WhatsApp Twitter Email
संबोधित करते कुलपति।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 पूसा। “कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन तकनीक और प्राकृतिक खेती का समावेश अब भविष्य की जरूरत है। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय कुछ गांवों में में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फसल निगरानी और ड्रोन से छिड़काव के पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर चुका है।”

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में 21वीं अनुसंधान परिषद (खरीफ) की तीन दिवसीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय ने उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि, “जलवायु परिवर्तन आज कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में डिजिटल तकनीकों को अपनाना अब विकल्प नहीं, आवश्यकता बन गई है।”

उन्होंने कहा कि, “वैज्ञानिकों का प्राथमिक लक्ष्य है अनुसंधान को ‘लैब टू लैंड’ पहुंचाना है। क्योंकि, प्रयोगशाला में विकसित तकनीक तभी सार्थक है जब वह किसान के खेत तक पहुंचे और उससे किसानों को लाभ हो।”

तकनीक-आधारित कृषि अनुसंधान की रूपरेखा :

बताते चलें कि, विद्यापति सभागार में आयोजित 21वीं अनुसंधान परिषद (खरीफ) की तीन दिवसीय बैठक के उद्घाटन सत्र में पिछले वर्ष के अनुसंधान कार्यों की समीक्षा की जायेगी और आधुनिक, जलवायु-अनुकूल एवं तकनीक-आधारित कृषि अनुसंधान की रूपरेखा तय करने पर विचार किया जायेगा।

शोध पत्र का लोकार्पण करते वीसी व अन्य।

स्वागत, व विमोचन :

इस अवसर पर सबसे पहले कुलपति डॉ पीएस पाण्डेय सहित आगत अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय कुलगीत प्रसारण एवं स्वागत अभिनंदन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। तत्पश्चात कृषि अनुसंधान निदेशालय द्वारा प्रकाशित तकनीकी पुस्तकों, शोध बुलेटिन और विस्तार पुस्तिकाओं का विमोचन और मक्का एवं बीज पर स्टेटस रिपोर्ट का भी लोकार्पण किया गया।

 देश की कृषि को देंगे नई दिशा :

इस अवसर पर जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय और नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ए.आर. पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछले लगभग चार वर्षों में देश भर में अपना महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। यहां के अनुसंधान और विकसित प्रभेदों से सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि देश भर के कृषकों को फायदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के प्रयास अन्य विश्वविद्यालयों को भी नई राह दिखा रहे हैं। यहां लीची, मखाना और मक्का जैसी फसलों पर उच्च स्तरीय अनुसंधान हो रहे हैं जो आने वाले समय में देश की कृषि को नई दिशा देंगे।

महिला किसानों के नेतृत्व वाला मॉडल अनुकरणीय :

डॉ. पाठक ने कहा फसल के साथ पशुपालन, मत्स्य और बागवानी को जोड़ना भी आवश्यक है, ताकि जोखिम घटे और आमदनी बढ़े। अपने संबोधन में डॉ पाठक ने विश्वविद्यालय के महिला किसानों के नेतृत्व वाले मॉडल को अन्य विश्वविद्यालयों को भी अपनाने की वकालत की।

उर्वरक का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना जरूरी :

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. इंदु शेखर सिंह, ने कहा कि, विश्वविद्यालय ने मखाना के क्षेत्र में उत्कृष्ट अनुसंधान संस्थान की शुरुआत की है और इसमें उन्नीस वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई है। मखाना के खेती, प्रसंस्करण , यंत्र और पूरे मार्केट चेन पर वैज्ञानिक ने विश्विद्यालय में कार्य शुरू कर दिया है। इन अनुसंधान के परिणाम से मखाना अनुसंधान को काफी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को जलवायु स्मार्ट बीजों पर भी कार्य करने के साथ –साथ मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आंकड़ों का उपयोग कर उर्वरक का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। 

2 संकर किस्में और दलहन में रोग प्रतिरोधी लाइनें विकसित :

इसके पूर्व अनुसंधान निदेशक डॉ. ए. के. सिंह ने स्वागत संबोधन के दौरान विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि, पिछले वर्ष अनुसंधान की प्रमुख उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए बताया कि पिछले वर्ष सूखा रोधी धान की 3 किस्में, मक्का की 2 संकर किस्में और दलहन में रोग प्रतिरोधी लाइनें विकसित की गईं हैं। 

सहयोग :

बताते चलें कि, यह 21वीं अनुसंधान परिषद की बैठक तीन दिनों तक चलेगी। इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के डीन और विभिन्न वैज्ञानिक अपनी अंतर्राष्ट्रीय , राष्ट्रीय एवं एवं विश्वविद्यालय संपोषित शोध परियोजनाओं की प्रस्तुति देंगे। इन परियोजनाओं को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारत सरकार, बिहार सरकार, नाबार्ड और यूनिसेफ जैसी संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है।

61 नए शोध प्रस्तावों पर भी चर्चा :

तकनीकी सत्रों में मिलेट्स, मखाना और लीची संवर्धन, प्राकृतिक व जैविक खेती, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मूल्य एवं मौसम पूर्वानुमान और फसल सुरक्षा से जुड़े 61 नए शोध प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। बैठक में मक्का की दो नई उन्नत संकर किस्मों राजेन्द्र हाइब्रिड मक्का 5 और राजेन्द्र हाइब्रिड मक्का 6 की पहचान और विमोचन को लेकर भी बाह्य विशेषज्ञो के द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बैठक में विश्वविद्यालय के सभी वैज्ञानिक, विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी शामिल हुए।

मौजूद वैज्ञानिक।

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

Average rating 0 / 5. Vote count: 0

No votes so far! Be the first to rate this post.

Dr. Rajendra Prasad Central Agriculture University Pusa ICAR Nabard
Share. Facebook WhatsApp Twitter Email
Dr. Sanjay Kumar
  • Website

Related Posts

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में 3 दिसंबर से सजेगा किसान मेला, तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा विश्वविद्यालय

25/10/2026

डीप लर्निंग जैसी उन्नत तकनीकें शोध एवं अनुसंधान में बेहद उपयोगी : डॉ. महेश

13/10/2026

अगले 5 दिनों में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज

09/10/2026
Leave A Reply Cancel Reply

Donate Now

Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • World
  • US Politics
  • EU Politics
  • Business
  • Opinions
  • Connections
  • Science

Company

  • Information
  • Advertising
  • Classified Ads
  • Contact Info
  • Do Not Sell Data
  • GDPR Policy
  • Media Kits

Services

  • Subscriptions
  • Customer Support
  • Bulk Packages
  • Newsletters
  • Sponsored News
  • Work With Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 oini24. Designed by CS.
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility
  • Contact

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Sign In or Register

Welcome Back!

Login to your account below.

Lost password?