
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें सभी विभागों के साथ जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की भागीदारी जरूरी है।
टीबी उन्मूलन की गतिविधियों को और प्रभावी बनाने को लेकर आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में उक्त बातें कही।
दवा के साथ पोषण उपलब्ध कराना जरूरी :
इस क्रम में उन्होंने कहा कि आज की तारीख में टीबी जानलेवा बीमारी नहीं है। नियमित उपचार, दवा और पोषण से यह ठीक हो सकता है। इस दौरान डीडीसी ने उपचाररत मरीजों की नियमित निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि मरीज निर्धारित अवधि तक दवा का पूरा कोर्स करें। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों को चिकित्सकीय उपचार और दवा के साथ समुचित पोषण उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत की गई समीक्षा :
बताते चलें कि,प्रधानमंत्री के टीबी-मुक्त भारत अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने और जिले में टीबी उन्मूलन की गतिविधियों को और प्रभावी बनाने को लेकर गुरुवार को समाहरणालय सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिसमें राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी की पहचान, जांच, उपचार और मरीजों को मिल रही सुविधाओं की समीक्षा की गई।
टीबी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना जरूरी :
बैठक में डीडीसी ने टीबी के संभावित मरीजों की समय पर पहचान और जांच कराने के साथ पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू करने का निर्देश दिया। डीडीसी ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में टीबी के लक्षणों, जांच एवं उपचार को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चला कर बीमारी से जुड़ी भ्रांतियों और सामाजिक कलंक को दूर करने पर जोर दिया।
सीएस सहित टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े पदाधिकारी रहे मौजूद :
सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी उन्मूलन को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। बैठक में डॉ. विशाल समेत स्वास्थ्य विभाग और टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े पदाधिकारी व कर्मी मौजूद रहे।