
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। जूट के रेशे से बनाए गए उत्पाद पर्यावरण अनुकूल है। नाबार्ड एवं औसेफा के इस पहल से जहां एक तरफ प्रधानमंत्री के लोकल फाॅर वोकल का सपना साकार हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ वेस्ट टू द बेस्ट का सिद्धांत भी मूर्त रूप ले रहा है।
नाबार्ड और ओसेफा के तत्वावधान में आयोजित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के आजीविका हेतु 20 दिवसीय प्रशिक्षण का निरीक्षण करते हुए एमएलसी डॉ. तरुण कुमार ने उक्त बातें कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि, जूट के हस्तशिल्प उत्पाद निर्माण प्रशिक्षण से पारंपरिक कला के संरक्षण व संवर्धन व महिलाओं में रोजगार सृजन के साथ-साथ महिलाओं में आत्मनिर्भरता आयेगी।
20 दिवसीय प्रशिक्षण :
जिले के स्वयं सहायता समूह भवन, परतापुर में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा प्रायोजित आजीविका और उद्यम विकास कार्यक्रम (एलईडीपी) योजनान्तर्गत अनमोल उपहार सेवा फाउंडेशन द्वारा आयोजित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के आजीविका हेतु 20 दिवसीय जूट के रेशे से हस्तशिल्प : सीखने से लेकर व्यवसाय बनाने तक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के 13वें दिन मानवाधिकार समिति के अध्यक्ष सह विधान पार्षद डॉ. तरुण कुमार ने औचक निरीक्षण व गतिविधियों का अवलोकन किया।
रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण :
इस क्रम में उन्होंने समूह की दीदीयों से संवाद करते हुए उनके द्वारा जूट के रेशे से निर्मित उत्पाद यथा पेन स्टेंड, फुल, डलिया, वाल हैंगिंग आदि के बारे में जानकारी ली और नाबार्ड एवं औसेफा के इस रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम कि सराहना की। इस दौरान उन्होंने नाबार्ड के सौजन्य से जिले के चीनी मील चौक पर स्थापित मिथिला ग्राम नाबार्ड रुरल मार्ट का भी अवलोकन किया और ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए मिथिला पेंटिंग व अन्य उत्पादों को सराहा।
भोपाल एवं चंडीगढ़ जाएंगे समस्तीपुर के कलाकार :
इस अवसर पर डीडीएम नाबार्ड अभिनव कृष्ण ने बताया कि नाबार्ड के राष्ट्रीय स्तर के मेले में महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद देश भर में आयोजित मेलों में भेजा जाता है। इस क्रम में भोपाल एवं चंडीगढ़ में अक्टूबर एवं नवम्बर माह में आयोजित मेले में समस्तीपुर से कलाकारों को भाग लेने हेतु भेजा जा रहा है। मौके पर औसेफा के सचिव ललित कुमार, कलाकार प्रेरणा कुमारी, प्रशिक्षक धर्मेंद्र राम, शिवनाथ महतो सहित तीस प्रशिक्षणार्थी मौजूद थी।