
ओईनी न्यूज नेटवर्क
Oini 24 समस्तीपुर। हाल ही में हुई वर्षा तथा मानसून की संभावना को देखते हुए किसान भाई धान की खेती केलिए अपने खेतों एवं मेड़ों की समुचित तैयारी कर लें।
समसामयिक सुझाव :
मानसून के आगमन और जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों लिए सलाह जारी करते हुए उक्त बातें कही है। वैज्ञानिकों द्वारा जारी समसामयिक सुझाव के अनुसार
सब्जियाँ:
भिंडी, कद्दू, खीरा, नेनुआ एवं लौकी की फसलों में निराई-गुड़ाई एवं खरपतवार नियंत्रण करें। पत्ती खाने वाली सूडियों एवं फल छेदक कीटों की नियमित निगरानी करें। प्रकोप होने पर डाइमेथोएट 30 ई.सी. का 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
धानः
धान की मध्यम अवधि वाली किस्मों जैसे संतोष, सीता, सरोज, सहभागी धान एवं राजेन्द्र श्वेता तथा सुगंधित किस्मों जैसे राजेन्द्र सुवासिनी, राजेन्द्र कस्तूरी एवं राजेन्द्र भगवती का बिचड़ा बीजस्थली में गिराने का कार्य करें। साथ ही धान रोपने के लिए जल धारण के लिए खेतों की मेड़ ऊंची और मजबूत करें।
मिर्च :
विषाणु (वायरस) रोगग्रस्त पौधों को पहचानकर उखाड़कर खेत से दूर मिट्टी में दबा दें। रोग के प्रसार को रोकने हेतु रोगग्रस्त पौधों को हटाने के बाद इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
हल्दी :
राजेन्द्र सोनिया एवं राजेन्द्र सोनाली किस्मों की बुआई करें। बुआई से पूर्व 25-30 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर खेत में मिलाएँ। 30-35 ग्राम वजन तथा 4-5 कलियों वाले स्वस्थ प्रकंदों की बुआई 30 × 20 सेमी दूरी एवं 5-6 सेमी गहराई पर करें। बीज प्रकंदों को डाइथेन एम-45 एवं बाविस्टिन से उपचारित करें।
अदरक :
मरान एवं नदिया किस्मों की बुआई करें। 20-30 ग्राम वजन तथा 3-4 कलियों वाले स्वस्थ प्रकंदों का चयन करें। बुआई से पूर्व 0.2 प्रतिशत रिडोमिल घोल से उपचारित करें तथा 30 20 सेमी दूरी पर रोपाई करें।
गरमा मूंग :
परिपक्व फलियों की तुड़ाई कर उन्हें अच्छी तरह सुखाकर सुरक्षित एवं सूखे स्थान पर भंडारित करें। फसल अवशेषों को मिट्टी पलटने वाले हल से खेत में मिलाकर हरी खाद के रूप में उपयोग करें।
गन्ना :
गन्ने की फसल में 30 किलोग्राम नत्रजन एवं 33 किलोग्राम फ्यूराडान प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। इसके बाद फसल में मिट्टी चढ़ाने (अर्थिग-अप) का कार्य करें।
ओल :
ओल की रोपाई शीघ्र पूर्ण करें। उत्तर बिहार के लिए गजेन्द्र अनुशंसित किस्म है। लगभग 0.5 किलोग्राम वजन वाले कन्दों की रोपाई 75 × 75 सेमी की दूरी पर करें।
लीची :
फल तुड़ाई के बाद बगीचों में आवश्यक छंटाई (प्रूनिंग) करें, जिससे पेड़ों के भीतर पर्याप्त धूप एवं हवा का संचार हो सके। साथ ही बगीचों की साफ-सफाई कर गिरे हुए पत्तों, सूखी टहनियों एवं अन्य अवशेषों को हटा दें, ताकि कीट एवं रोगों का प्रकोप कम हो सके।
अन्य कृषि परामर्श :
साथ ही, आगामी दिनों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना को देखते हुए कटी हुई तैयार फसलों जैसे रबी मक्का एवं गरमा मूंग को अच्छी तरह सुखाकर सुरक्षित एवं सूखे स्थान पर भंडारित करें। संभावित वर्षा को ध्यान में रखते हुए सिंचाई कार्य स्थगित रखें तथा सब्जियों के खेतों से जल निकास की समुचित व्यवस्था बनाए रखें, ताकि जलजमाव से फसलों को नुकसान न हो।